नगर निगम से करोड़ों रुपये लेने के बाद भी इको ग्रीन नहीं कर पाया शहर को साफ़, उठने लगी आवाजें

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फरीदाबाद – घर-घर से कचरा उठाने के काम में लगी इकोग्रीन कंपनी को अब तक फरीदाबाद नगर निगम की ओर से 53 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, फिर भी शहर साफ नहीं है। ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 की अनदेखी की जा रही है। इकोग्रीन एमओयू के मुताबिक काम नहीं कर रहा है। फिर भी प्रदेश सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अब इन मुद्दों पर आवाज बुलंद करने को जन अधिकार मंच आगे आया है। मंच के अध्यक्ष पीपी कपूर जल्दी ही मुंख्यमंत्री मनोहर लाल और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज से मिलकर इकोग्रीन की कार्यप्रणाली से अवगत कराएंगे।

बृहस्पतिवार को पीपी कपूर गांव सीही के रकबे में बनाए जा रहे डंपिग साइट के विरोध में चल रहे धरने में भी शामिल हुए थे। उन्होंने इकोग्रीन की मनमानी पर केंद्रित करते हुए आवाज उठाई।

बता दें कि दिसंबर, 2017 में इकोग्रीन ने घर-घर से कचरा एकत्र करने का काम शुरू किया था। शुरुआती दौर में 40 में से 5 वार्डों में काम शुरू किया गया था। बाद में अन्य सभी वार्डों में काम चालू किया गया था।

पीपी कपूर के अनुसार एमओयू में जो शर्तें हैं, उनका पालन नहीं किया जा रहा। हर वार्ड में ठोस कचरा प्रबंधन नियम के मुताबिक गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करके ही एकत्र किया जाना था, मगर अब तक पूरी तरह ऐसा नहीं हो पाया है। बंधवाड़ी में 36 एकड़ जमीन पर प्लांट चल रहा है। जहां फरीदाबाद और गुरुग्राम का कचरा डाला जा रहा है। इकोग्रीन को दो वर्ष में बंधवाड़ी प्लांट पर कचरे से बिजली बनाने की भी व्यवस्था करनी थी, मगर नहीं की गई। अब सीही के रकबे में डंपिग साइट बनाने की तैयारी की गई है। पीपी कपूर ने कहा कि एमओयू के मुताबिक बंधवाड़ी में दो वर्ष तक पावर प्लांट लग जाना चाहिए था। इस अवधि तक नगर निगम की ओर से इकोग्रीन को कचरा एकत्र करने की एवज में एक हजार रुपये प्रति टन भुगतान किया जाना था। इसके बाद 333 रुपये प्रति टन भुगतान किया जाना चाहिए था, पर हैरानी है कि अब तक इकोग्रीन को एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से ही भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, मगर शहर साफ नहीं है।
रिपोर्टर
अभय गिरी

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