संविधान में वर्णित अधिकारों का हनन करना है अपराध: प्रियंका सिंह

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अम्बेडकरनगर
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष पीएन मिश्र के निर्देशों के अनुपालन में शुक्रवार को अकबरपुर तहसील सभागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कोविङ-19 महामारी को दृष्टिगत जारी दिशा-निर्देशों के तहत हुआ। प्राधिकरण सचिव सुश्री प्रियंका सिंह की अध्यक्षता में हुए शिविर में उपस्थित लोगों को जानकारी दी गई।शिविर को सम्बोधित करती हुई प्राधिकरण सचिव ने कहा कि सामान्य जीवनयापन के लिए प्रत्येक मनुष्य के अपने परिवार कार्य सरकार और समाज पर कुछ अधिकार होते हैं, जो आपसी समझ और नियमों से निर्धारित होते हैं।उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसम्बर 1948 को सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र को आधिकारिक मान्यता दी। मानव अधिकार में व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है जो संविधान के भाग तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से वर्णित है। उल्लंघन करने वालों को अदालत सजा भी देती है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, आजादी और सुरक्षा का अधिकार है। गुलामी अथवा दासता से आजादी का अधिकार अर्थात् किसी भी व्यक्ति को गुलामी अथवा दासता की हालत में नहीं रखा जा सकता है। गुलामी प्रथा और व्यापार पूरी तरह निषिद्ध होगा। किसी को शारीरिक यातना नहीं दी जा सकती और न किसी के भी प्रति निर्दय अमानवीय अथवा अपमानजनक व्यवहार किया जा सकता है। शिविर में तहसीलदार न्यायिक धर्मेन्द्र सिंह, अधिवक्ता दुर्गा प्रसाद मिश्र, अशोक सिंह, शेर बहादुर यादव व अन्य मौजूद रहे।