कम्पोजिट स्कूल डिलीया की छात्रा सुनैना को शोध कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किया गया

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गाजीपुर। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली द्वारा संचालित 31वी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का समापन तीन दिसंबर को विद्या शंकर पब्लिक स्कूल, अदालहत, जनपद मिर्जापुर में हुआ। जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों के समक्ष बच्चों द्वारा अपने अपने शोधकार्य को प्रस्तुत किया गया। इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभागिता हेतु इक्कीस शोधपत्र का चयन किया जाना था। जिसमें कम्पोजिट स्कूल डिलीया सदर गाजीपुर की सुनैना जिन्होंने डाँ ऋतु श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य किया था का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। जनपद गाजीपुर से चयनित चार प्रतिभागियों के लघुशोध राज्य स्तर पर प्रजेन्टेशन के लिए चयन किया गया था, जिसमें गाजीपुर से छात्र शिवांश उच्च प्राथमिक विद्यालय गोराबजार नगर क्षेत्र जिन्होंने ए आर पी शिला सिंह के मार्गदर्शन में शोध कार्य किया था, उच्च प्राथमिक विद्यालय कटघरा मनिहारी की अनन्या चौहान जिन्होंने विज्ञान शिक्षिका अर्चना सिंह के मार्गदर्शन में अपना शोध किया था। कम्पोजिट स्कूल डिलीया सदर गाजीपुर की सुनैना जिन्होंने डाँ ऋतु श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य किया था एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बासुपुर देवकली की अंकिता कुशवाहा जिन्होंने आर्कि मिश्रा के मार्गदर्शन में शोध कार्य पूर्ण किया था। इन सभी बाल वैज्ञानिकों ने एक से तीन दिसंबर को विद्या शंकर पब्लिक स्कूल, अदालहत, मिर्जापुर में आयोजित राज्य स्तरीय आयोजन में गाजीपुर जिले की तरफ से जिला समन्वयक राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस सन्तोष कुशवाहा के नेतृत्व में प्रतिभाग किया था। कार्यक्रम में बच्चों ने किसी घटना के घटीत होने कारण का पता लगाने एवं मस्तिष्क में उत्पन्न जिज्ञासा को स्वयं सूक्ष्म निरीक्षण, सर्वेक्षण तथा विश्लेषण कर पुनः प्रयोग करके प्राप्त परिणाम को वैज्ञानिकों के बीच रखने का अवसर मिला। प्रतिभागी बच्चों को राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों के अनुसंधान एवं प्राप्त परिणाम से अवगत होने का सुअवसर भी इस मंच से सहजता पूर्वक प्राप्त हुआ। विज्ञान के सिद्धांत का उपयोग करके जनमानस में अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों के क्रियाकलाप का वैज्ञानिक श्री प्रमोद मिश्रा जी द्वारा बच्चों के समक्ष प्रदर्शन कर सभी को किसी भी कारण पर वैज्ञानिक विधि से सोचने के लिए प्रेरित किया। वैज्ञानिक एवं बच्चों की फेस टू फेस कार्यक्रम ज्ञानप्रद एवं प्रभावशील रहा जो सभी को घटना के घटित होने के कारण की जानकारी मिली। कृषि वैज्ञानिक द्वारा सब्जियों में पायी जाने वाले पोषक तत्वों का उपयोग कर विभिन्न रोगों से मुक्त होने की जानकारी तथा उनके गुणवत्ता एवं उत्पादन में उत्तरोत्तर वृद्घि हेतु डी एन ए स्तर पर हो रहे कार्य कुतूहल पूर्ण रहा। शासन द्वारा ग्रामीण स्तर पर वितरण होने फोन चावल में भी प्लास्टिक होने की संभावना को कृषि वैज्ञानिक ने निरस्त करते हुए बताया कि इस समय किसी क्षेत्र में अगर रिसर्च से पता चलता है कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व की कमी है तो उस पोषक तत्वों को चावल में मिलाकर उस क्षेत्र में वितरण किया जाता है ताकि उस एरिया के लोगों को पोषक तत्वों की परिपूर्ती हो सके ।इसलिए उस बोरी पर यह लिखा होता है कृपया इसे धोकर न खाये। खाने में प्लास्टिक जैसा अनुभव न होने पर प्लास्टिक युक्त ना माने। वैज्ञानिक श्री सुनील पाण्डेय जी द्वारा प्रकाश एवं अति रासायनिक उर्वरक के उपयोग के कारण जुगनू एवं अन्य जीवों के जीवन चक्र पर पड़ने वाले प्रभाव से जीवों के विलुप्त होने के बारे में जानकारी प्रदान की गई। गाजीपुर जनपद से चयनित सभी बाल वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला संरक्षक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सैदपुर के प्राचार्य एवं जिला विद्यालय निरीक्षक गाजीपुर और बेसिक शिक्षा अधिकारी गाजीपुर ए़वं खण्ड शिक्षा अधिकारी ने बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान की है।

जय प्रकाश चंद्रा, ब्यूरो चीफ, गाजीपुर

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