नई दिल्ली :भारत के कोविड-19 संक्रमण (Covid-19 Infection) के खिलाफ एक वैक्सीन (Vaccine) बनाए जाने के प्रयास में अभी करीब 12 से 18 महीने का समय लगेगा. और इसका त्वरित फोकस पुन: संयोजित की गई बैसिलस कलमेटे-गुएरिन (BCG) वैक्सीन के ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल पर होगा, जिसे प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने वाला माना जाता है. यह बात बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) की सचिव रेणु स्वरूप ने कही है.
भारत, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कुछ अन्य वैश्विक एजेंसियों (Global Agency) के साथ देश में वैक्सीन रिसर्च (Vaccine Research) को बढ़ाने को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) में तेजी लाने के लिए सहयोग कर रहा है.बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने सोमवार को SARS-COV-2 के खिलाफ डीएनए वैक्सीन के निर्माण में तेजी लाने के लिए कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड (Cadila Healthcare Ltd) और इनएक्टिवेटेड रेबीज वेक्टर प्लेटफॉर्म के प्रयोग के जरिए कोविड-19 वैक्सीन के निर्माण के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (Bharat Biotech International Limited) को फंडिंग दिए जाने को अनुमति दे दी है. डीबीटी, शैक्षणिक संस्थानों, जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस को भी वैक्सीन कैंडिडेट विकसित करने के लिए समर्थन दे रहा है. ये कुछ सरकारी संस्थान हैं जो कि वैक्सीन को बनाने और वैक्सीन के रिसर्च प्रोजेक्ट्स में लगे हुए हैं.
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स्वरूप ने कहा है, “वैक्सीन का निर्माण हमारे लिए प्राथमिकता है. इंडस्ट्री इसमें आगे तक पहुंच चुकी है और कई अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं. हमारी अपनी भारतीय कंपनियां (Indian Companies) इस साल के आखिरी तक इसकी तैयारी कर सकती हैं कि वे कैसे आगे बढ़ सकते हैं. साफ तौर पर हम यह कह सकते हैं कि वैक्सीन बनने में 12 से 18 महीने का समय लगेगा.”



