दबंगों ने पहले दी जान से मारने की धमकी बड़े चालाकी से किया हत्या पुलिस दे रही हत्यारे का साथ

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जौनपुर थाना सिंगरामऊ क्षेत्र के तुलसीपुर गांव के दो पक्षों में जमीनी विवाद को लेकर जान से मारने की मिली धमकी फिर कातिल ने दिया अंजाम पुलिस नहीं कर रही कोई कार्यवाही जिसमें दबंगों की दबंगई चरम सीमा पार कर गई मारपीट के दौरान हुई मौत पुलिस बंद कर रखी अपनी आंखें ।थाना सिंगरामऊ क्षेत्र के तुलसीपुर गांव में दिनांक 25 मई 2020 को जमीनी विवाद को लेकर मारपीट हो गई जिसमें सचिन पुत्र अमरनाथ, अमरनाथ पुत्र समई, संगीता पत्नी अमरनाथ ने शशिधर पुत्र हीरालाल , हीरालाल पुत्र अलगू को गोली, चाकू मारकर हत्या करने की धमकी दी। शशिधर ने लिखित सूचना थाना सिंगरामऊ को दिया लेकिन दरोगा ने डांट कर भगा दिया जिससे मनमानी करते हुए सचिन का मन और बढ़ गया और बीच में पूनः मारपीट का कई अंजाम देता रहा लेकिन पुलिस का सय मिलने से पुनः 21 अगस्त को सचिन पुत्र अमरनाथ, अमरनाथ पुत्र समई व संगीता पत्नी अमरनाथ ने एकजुट होकर लाठी-डंडे व
राड, कुल्हाड़ी से शशिधर और उनके पिता हीरालाल को मारकर बुरी तरीके घायल कर दिया जिसके कारण शशिधर के सर पर कुल्हाड़ी की चोट वह पिता हीरालाल के पेट में अंदरूनी चोट लगने से हालत गंभीर हो गई जिसकी लिखित सूचना थाने पर दी गई तो पुलिस ने पीड़ितों को इलाज हेतु बहाना कर करते हुए डांट कर भगा दिया जख्मी व्यक्तियों का मेडिकल भी नहीं कराया जिसमें एनसीआर 323 504 में मुकदमा दर्ज करके मामला दबाने की कोशिश किया लेकिन गंभीर चोट लगने से हीरालाल पुत्र अलगू इलाज के दौरान दूसरे दिन मौत हो गई जिसके उपरांत लाश को पोस्टमार्टम करा कर पुलिस ने दाह संस्कार कर दिया पुलिस मुजरिमों को बचाते हुए दोषी व्यक्ति 3 थे परंतु मात्र दो सचिन,संगीता के खिलाफ धारा 323 504 304 में मुकदमा दर्ज कर दिया गया लेकिन अभी तक मुजरिमों की गिरफ्तारी नहीं हुई पीड़ित अपनी पीड़ा थाने पर सुनाते हैं तो थाने वाले उन्हें गाली गलौज देकर भगा देते हैं यहां तक की एफ आई आर कॉपी देने से थाने वालों ने इनकार कर दिए पुलिस अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं किया है दोषी व्यक्ति को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है पीड़ित व्यक्ति को उल्टा मुकदमा में फंसाने की धमकी पुलिस दे रही है अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय का क्या होगा पीड़ित की बातें कोई सुनने वाला नहीं पीड़ित व्यक्ति का कहना है कि सचिन द्वारा आए दिन व्हाट्सएप ऑडियो रिकॉर्डिंग के द्वारा परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी लेकिन पुलिस की मिलीभगत के कारण उन्हें अपने परिवार को खोना पड़ा जब उसके परिवार के लोग थाने में लिखित सूचना दे रहे थे तो पुलिस ने उनकी सूचना को स्वीकार नहीं किया बल्कि अपनी मनमानी करते हुए पुलिस ने अपने ढंग से जो चाहा वही लिखाया । पुलिस द्वारा पीड़ित की आवाज दबाई गई।
संवाददाताः विनोद कुमार गौतम

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