कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दृष्टिगत सरकार जहाँ बाजारों मे भीड़ भाड़ न होने के लिए काफी प्रयासरत है और कुछ शहरों बाजारों को वैसे ही बंद करने हेतु निर्देशित किया गया है। जिससे उक्त महामारी से निजात मिल सके ।
स्थिति को देखते हुए जिन बाजारों में श्रम प्रवर्तन विभाग द्वारा पारित साप्ताहिक बंदी को भी लागू किया गया है उसी को ध्यान में रखते हुए कई बाजारों में विभाग ने पुलिस के माध्यम से बंदी सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन चंदवक जैसे बड़े बाजार में पिछले सप्ताह थानेदार मय फोर्स सब्जी, फल, दूध, की दुकानों के साथ सभी दुकानों को पूर्ण तया बंद करा कर सभी दुकान्दारों मे भय तो पैदा किये जिसका नतीजा दूसरे साप्ताहिक बंदी पर छोटे दुकान्दारों ने भय बस दुकाने बंद रखी तो वहीं बड़े दुकान् दार साप्ताहिक बंदी का विरोध कर मासिक बंदी के पक्ष में हो कर दुकाने खोलें रखी।जिससे साप्ताहिक बंदी पर पुलिस व श्रम विभाग द्वारा कोई नकेल कसता दिखाई नहीं दे रहा।
इस मामले में उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश पाठक से पूछा गया तो उन्होंने बताया की फल, सब्जी, मेडिकल की दुकाने छोड़ सभी दुकानें पूर्ण रूप से बंद कर साप्ताहिक बंदी का सख्ती से पालन होना चाहिए इसके लिए मैं बात करता हूँ। स्थानीय थानाध्यक्ष दिग्विजय सिंह के यहाँ कुछ बड़े दुकानदारों ने पहुँच अपना पक्ष रखा तो उन्होंने कहा मेरे यहाँ कोई बंदी का निर्देश नहीं मिला है लेकिन बंदी होना चाहिए।
अब सवाल उठना लाजमी है की छोटे दुकानदार भय बस अपनी दुकान बंद तो रखे लेकिन कुछ बड़े दुकान्दारों ने अपनी दुकानों को खोले रखा। पिकेट के सामने भी दुकान खोलकर सारा दिन बिक्री चलती रही पुलिस मुक दर्शक बनी रही।
