मार्टीनगंज: दूसरे देवरिया काण्ड के दोहरान पर पारा गांव, लेखपाल की धमकी से डरा परिवार

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अधिकारियों की लीपापोती ही दिमाग की नशों को कर देती है सुन्न, जब कर्मचारी ही करने लगता है उत्पीड़न, जब माननीय उच्च न्यायालय का आदेश भी अधिकारियों पर कोई असर नहीं दिखाता, जब अधिकारी कर्मचारी ही उत्पीड़न करने का निकाल लेते हैं कोई अलग रास्ता तो फिर प्रश्न बनता है कि आम नागरिक करे भी तो क्या? फिर वही होता है जिसकी आशा नहीं की जाती और बनती एक नये अपराध करने की लीक | मामला आजमगढ़ जिले के मार्टीनगंज तहसील क्षेत्र के थाना सरायमीर के पारा गांव का है जहां दो पक्षों अमरचंद,करमचंद और रामअवतार में रास्ते को लेकर विवाद था, विवाद रास्ते का और रास्ता सरकारी जमीन का है| हलांकी जिस जमीन पर रास्ते को लेकर विवाद था उसे मार्टीनगंज के अधिकारियों कानूनगो और लेखपाल द्वारा 12/10/2022 को खाली करा दिया गया था| चूंकी समय बीता कुछ समय बाद अमरचंद और करमचंद घर के पीछे खाली कराये रास्ते पर घर अन्दर से ही सहन के लिये द्वार खोल लिये चूंकी अमरचंद और करमचंद का पूरा घर जमीन अतिक्रमण कर बनाया गया है| जब इस तरह से रास्ते में सहन के लिये द्वार फोड़ा गया तो दूसरा पक्ष रास्ते के दूसरी तरफ घर बनाने लगा और उपजिलाधिकारी मार्टीगंज को करमचंद अमरचंद द्वारा अतिक्रमण की हुई जमीन को खाली कराने का प्रार्थना पत्र दे दिया और उपजिलाधिकारी निर्देशन में हल्का लेखपाल दोनों पक्षों की जमीन की पैमाइस कर जुर्माना लगाकर जमीन खाली करने का आदेश दे दिये| हलांकी रामअवतार जमीन को खाली करने को कहा लेकिन विपक्ष अमरचंद,करमचंद नहीं राजी हुये| रामअवतार हाईकोर्ट के सहारे फिर से अवरूद्ध रास्ते को खाली कराने की अर्जी लगा दी| माननीय उच्च न्यायालय ने न्यायहित हेतु अतिक्रमित जमीन को खाली कराने का आदेश दे दिया| रामअवतार ने बताया अब लगातार हल्का लेखपाल,विपक्ष और अराजक तत्त्वों के साथ मिलकर उक्त विवादित जमीन पर निर्माण करवाने के लिये योजना बना रहे हैं| अब देखना है एक बार जमीन को खाली कराया गया फिर उसी जमीन पर अधिकारी और कर्मचारी आखिर क्यों निर्माण कराना चाहते हैं?क्या उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन सही हो रहा है?रामअवतार ने आरोप लागाया की निस्तारण के सम्बन्ध में हर तरफ से हमारा शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है|

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