पूर्व मंत्री व उनके भाई की चिकित्सा व्यवस्था के लिए जेल अधीक्षक को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशो का पालन नहीं करने पर एसपी को भेजी गई आदेश की प्रति
पूर्व मंत्री के कब्जे से लाइसेंसी राइफल व 35 जिंदा कारतूस,भाई अजय के कब्जे से लाइसेंसी पिस्तौल व नौ जिंदा कारतूस दो मैगजीन एवं पुत्र अभिजीत के कब्जे से एक लाइसेंसी पिस्तौल व 13 जिंदा व दो फार्च्यूनर बरामद
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सुलतानपुर। जमीनी विवाद को लेकर हुए जानलेवा हमले एवं आपराधिक साजिश रचने समेत अन्य आरोपो से जुड़े मामले में नामजद पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह व उनके पुत्र अभिजीत प्रताप सिंह एवं प्रकाश में आए उनके बड़े भाई अजय प्रताप सिंह समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवनीत सिंह की अदालत में सोमवार को पेश किया गया। कोर्ट में पेश आरोपियों की रिमांड पर सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री व अन्य आरोपियों की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए रिमांड पर आपत्ति जताई। वहीं अभियोजन अधिकारी व वादी के निजी अधिवक्ता संतोष पाण्डेय ने पुलिस की कार्रवाई को जायज बताया और आरोपियों को जेल भेजने की मांग किया। उभय पक्षों को सुनने के पश्चात सीजेएम नवनीत सिंह की अदालत ने लगी धाराओ के अनुसार आरोपियों की रिमांड एक सप्ताह के लिए स्वीकार करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है। वहीं अदालत ने बचाव पक्ष की मांग पर बीमारी से ग्रसित बताए गए पूर्व मंत्री व उनके भाई को चिकित्सा व्यवस्था के लिए जिला अस्पताल ले जाने एवं उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार अपेक्षित कार्रवाई के लिए जेल अधीक्षक को निर्देशित किया है। अदालत ने किसी भी असलहे को न्यायालय के समक्ष सील व मोहर के साथ पेश नहीं करने पर विधि सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए आर्म्स एक्ट में रिमांड पर विचार नहीं किया और एसपी को आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया है।
अखंडनगर थाने के कल्यानपुर गांव के रहने वाले जिलाजीत यादव ने 15 मार्च की सुबह नौ बजे की घटना बताते हुए स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज कराया। उनके आरोप के मुताबिक जमीनी विवाद को लेकर स्थानीय थाने के रतनपुर मैरवा निवासी पूर्व राज्य मंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह,उनके पुत्र अभिजीत सिंह,गांव के आरोपी अरुण सिंह एवं स्थानीय थाने के कल्यानपुर गांव के रहने वाले आरोपी अमन यादव,आनंद यादव,अरविंद यादव,चन्दीपुर निवासी सतीश सिंह,अमित सिंह व अंबेडकर नगर जिले के नेमपुर मालीपुर निवासी हलचल तिवारी एवं उनके अज्ञात साथियों ने पिस्टल व रिवाल्वर एवं हाथों में लाठी-डंडा लेकर जान से मार डालने की नीयत से हमला किया। वादी ने आरोपियो के जरिए फायरिंग भी करने का आरोप लगाया है। घटना में वादी पक्ष के संजय यादव,शोभावती, रोशनी,प्रांकुश यादव,कमलेश यादव व विपुल यादव को घायल होने की बात सामने आई,जिनकी हालत गम्भीर बताई गई। मामले में लापरवाही बरतने वाले एसओ संत कुमार सिंह पर गाज गिरी,वहीं घटना के दिन मामले में मीडिया को अपना बयान देते समय पूर्व मंत्री का नाम लेने से परहेज करने वाले सीओ विनय गौतम की भूमिका की जांच भी होने की बात सामने आई है। मामले में आरोपी पूर्व मंत्री राणा अजीत सिंह के पक्ष में स्नातक निर्वाचन के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का एसपी को सम्बोधित पत्र भी सामने आया,फिलहाल उनकी पैरवी का कोई असर मामले में अभी नहीं दिखा। उधर विधायक राज बाबू उपाध्याय भी इस मामले को लेकर चर्चा में बने हुए है। एसपी चारू निगम की सक्रियता से घटना के कुछ ही घण्टो बाद पुलिस ने लखनऊ भागने के फिराक में रहे नामजद आरोपी पूर्व मंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह व उनके पुत्र अभिजीत प्रताप सिंह के साथ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में प्रकाश में आए स्थानीय थाने के रतनपुर मैरवा निवासी पूर्व मंत्री के भाई अजय प्रताप सिंह व सह आरोपी अभिषेक राणा, कल्यानपुर निवासी संजीत यादव,जयसिंहपुर थाने के कारेबन निवासी आदित्य सिंह उर्फ मार्शल,बहराइच जिले के बिसवा-बौडी निवासी बिक्कू सिंह,आजमगढ़ जिले के जहानागंज-मिंटूपुर निवासी ऋतिक राय को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पूर्व मंत्री के कब्जे से लाइसेंसी राइफल व 35 जिंदा कारतूस,अजय प्रताप सिंह के कब्जे से लाइसेंसी पिस्तौल व नौ जिंदा कारतूस दो मैगजीन एवं अभिजीत प्रताप सिंह के कब्जे से एक लाइसेंसी पिस्तौल व 13 जिंदा कारतूस एवं दो फार्च्यूनर बरामद किया है। मामले में पकड़े गए पूर्व मंत्री समेत आठ आरोपियो को गिरफ्तार कर कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को अदालत में पेश किया गया। कोर्ट परिसर में लगातार एडिशनल एसपी अखंड प्रताप सिंह सुरक्षा व विधिक कार्यो की मॉनिटरिंग करते रहे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई थानों की पुलिस कोर्ट परिसर में मौजूद रही। एसपी चारु निगम रिमांड स्वीकार हो जाने की खबर न मिल जाने तक अपने अधीनस्थो से पल-पल की अपडेट लेती रहीं,पूरे मामले में एसपी की सक्रियता चर्चा में रही। रिमांड पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पूर्व मंत्री व उनके परिजनों की मौजूदगी घटना के समय नहीं होने सम्बन्धी सीसीटीवी फुटेज व लोकेशन सहित अन्य तर्क पेश किए। वहीं अभियोजन पक्ष ने शुरू से ही पूर्व मंत्री की घटना में साजिश व सक्रिय भूमिका होने के चलते इतनी बड़ी व दुस्साहसिक घटना को अंजाम देने का तर्क पेश किया। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने पूर्व मंत्री,उनके पुत्र व भाई का रिमांड आपराधिक साजिश व हमले समेत अन्य आरोपो में स्वीकार किया है,जबकि शेष पांच आरोपियो का साजिश के अलावा हमले सहित अन्य धाराओं में रिमांड स्वीकार किया है। सभी आरोपियों की रिमांड 23 मार्च तक स्वीकार करते हुए अदालत ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया है । वहीं पूर्व मंत्री व उनके बड़े भाई की चिकित्सा व्यवस्था के लिए सशर्त आदेश भी पारित किया है। बरामद किए गए असलहों को नियमानुसार सील मोहर कर पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने आर्म्स एक्ट की धारा में रिमांड पर विचार नहीं किया और इसे नियम का उल्लंघन मानते हुए एसपी को कोर्ट ने आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है। घटना में शामिल नामजद व अन्य आरोपियो की तलाश में पुलिस लगातार जुटी हुई है।
के मास न्यूज संवाददाता दोस्त पुर
















