जौनपुर ,गौराबादशाहपुर।
हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसलिए इस दिन मां सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, साथ-साथ आज से ऋतुराज बसंत भी प्रारंभ हो जाता है, बसंत पंचमी का पर्व कुछ लोग शौर्य दिवस के रूप में भी मनाते हैं, क्योंकि आज ही के दिन अंतिम हिंदू शासक क्षत्रिय कुल भूषण, हिंद शिरोमणि, सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने दुष्ट आतताई मुगल शासक मोहम्मद गोरी का वध किया था, सत्रह बार पराजित करने के बाद भी पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को जीवनदान दे दिया था, परंतु एक बार छल से पराजित करने के बाद मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को तरह-तरह की यातनाएं दी थी, इतिहासकारों की ऐसी मान्यता है कि पृथ्वीराज महान गौ भक्त थे, यह बात जब गौरी को पता लगा तो उसने रण क्षेत्र में ढेर सारी गायों को आगे करके उनके पीछे से लड़ना शुरू किया, जिससे वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान यह सोचकर अस्त्र-शस्त्र चलाना उचित नहीं समझे कि ,कहीं गौ हत्या ना हो जाए, जिसका लाभ उठाकर छल से पृथ्वीराज को बंदी बना लिया और सत्रह बार जीवनदान पाने वाले दृष्ट आतताई ने एक बार भी जीवन दान देना उचित नहीं समझा, और बंदी बनाकर महीनों भूखा रखा एवं उनकी दोनों आंखें भी फोड़ दी, आंखें ना होने के बावजूद भी उसका बदला पृथ्वीराज ने राज कवि चंदबरदाई के एक इशारे पर अपने हाथों शब्दभेदी बाण से मृत्युदंड देकर ही चुकाया, इसके बाद राज क!वि चंदबरदाई के साथ खुद भी बीरगति को प्राप्त हो गए,इससे एक बहुत बड़ी सीख मानव को मिलती है कि दुश्मन को उचित सम्मान देना ठीक है लेकिन मौका देना कदापि ठीक नहीं है।
संवाददाता जौनपुर
अनिल आर्या
