जौनपुर..परिचय एक ऐसी शख्सियत की जिसने अपना जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया

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डॉ0जयसिंह राजपूत
गौराबादशाहपुर
जौनपुर।

जिंदगी के संघर्ष से डरता नहीं हूँ।
आंख में आँसू कभी भरता नहीं हूँ।
लाख कोशिश कर मरे सौ सौ बहाने-
गुप्त समझौता कभी करता नहीं हूंँ।।

जिला मुख्यालय जनपद जौनपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर गौराबादशाहपुर कस्बे से सटे एक छोटे से ग्राम बंजारेपुर में “अग्निवंशीय चौहान” किसान परिवार में स्व0 वालिकरन सिंह के घर में 8 अगस्त सन 1966 ई0 को एक असाधारण प्रतिभा के धनी बालक का जन्म हुआ, जिसे परिवार वालों ने बड़े ही लाड़ प्यार से पाला और किशोरावस्था में प्रवेश करते ही उनकी सच्चाई और ईमानदारी समाज में पनप रहे कुरीतियों के खिलाफ उग्र तेवर को देखते हुए उनका नाम जयसिंह राजपूत रखा गया, जिनकी शिक्षा-दीक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में संपन्न हुई तथा उन्होंने वर्ष 1989 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और समाज सेवा में संप्रेषण की भावना से ओत-प्रोत होने के नाते सन 1994 ई0 में आयुर्वेद से बीए.एम.एस (आयुर्वेद रत्न) की उपाधि प्राप्त की तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने संपूर्ण जीवन को समर्पित करते हुए प्रैक्टिस प्रारंभ किया, तथा अत्याधुनिक भावनाओं से दूरियां बनाते हुए आपने देखा कि इस पवित्र पेशे में भगवान का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद भी वहां के अन्य सहकर्मियों द्वारा नाजायज लाभ प्राप्त करने की बुरी नीयत को देखते हुए आपने अपने स्वच्छ एवं सैद्धांतिक,सिद्धांतों से समझौता किए बगैर उक्त पेशे की तिलांजलि देना मुनासिब समझा और 15 वर्षों की कठोर सेवा भाव और समर्पण के पश्चात आप उक्त पेशे से दूरी बनाते हुए समाज सेवा हेतु अन्य संसाधनों व माध्यमों में तल्लीन हुए।
समय निरंतर अपनी गति व आवेग में चलता रहा उसी दौरान समय ने करवट लिया और डॉ राजपूत के असीमित शक्ति और पथ प्रदर्शक रहे उनके पिता श्री बलिकरन सिंह का दि0-19 दिसंबर सन 2000 ई0 को स्वर्गवास हो गया, परंतु विषम परिस्थितियों में भी एक तरफ जहां पिता की मृत्यु ने डॉ0साहब के जीवन को झकझोर कर रख दिया और जीवन में उन को अपूरणीय क्षति हुई वहीं दूसरी तरफ पिता के समतुल्य बड़े भाई जो डॉ0साहब के जीवन निर्माण के पग-पग पर पथ प्रदर्शक थे तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य को नहीं छोड़ते हुए जनता के साथ अनवरत संघर्ष हेतु संकल्पित रहने का मार्ग प्रशस्त कराया ,जो डॉक्टर साहब के जीवन में पिता तुल्य थे यानी श्री राजनारायण सिंह की छत्रछाया में उनके जीवन में पिता की अनुपस्थिति में आशा की एक नई किरण का स्वरूप प्रदान किया।
तत्पश्चात जनपद में अपनी छवि एवं ईमानदारी की पराकाष्ठा को प्राप्त कर रहे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित संस्था अपराध निरोधक कमेटी जनपद जौनपुर के अनुमोदन पर वर्ष 2012 में थाना अपराध निरोधक कमेटी गौराबादशाहपुर के अध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति से मनोनीत किए गए, एवं अपने आचरण में और दृढ़ता प्रदान करने हेतु विपरीत परिस्थितियों में कार्य करने की शपथ के साथ देश में पनप रहे गोरक्षा के प्रति पूर्ण भाव से समर्पित तथा उक्त कमेटी में कार्यरत रहते हुए क्षेत्रीय कसाइयों द्वारा ले जाए जा रहे ,गोकशी हेतु गौ रक्षा के बिंदु पर आवाज बुलंद करते हुए आम जनमानस के साथ विशाल आंदोलन करते हुए उक्त अवैध तरीके से हो रहे गोवंश तस्करी, मांस निर्यात पर प्रतिबंध एवं आरोपियों को सजा दिलाने हेतु कार्य करते रहे,जिसके परिणाम स्वरूप आपको विभिन्न धाराओं 341,143,336, IPC व 7Cla Act. के तहत पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन के द्वारा नामजद अभियुक्त बनाया गया परंतु आपने कठोर प्रवृत्ति व विपरीत परिस्थितियों में धैर्य न छोड़ने वाले डॉ0साहब के द्वारा निरंतर संघर्ष जारी रखा गया।
विगत तीन वर्ष बाद उक्त घटना के पश्चात पुनः गौराबादशाहपुर क्षेत्र में घटित घटना ने हर व्यक्ति के जेहन में एक हलचल सी पैदा कर दिया,हुआ यह कि कसाइयों द्वारा बैल(सांड़) को गोकशी की बलिवेदी पर चढ़ाए जाने के अपराधिक प्रयास को विफल करते हुए आपके द्वारा उनके चंगुल से मुक्त कराकर गौशाला भेजवाया गया,घटना में शामिल आरोपियों को परोक्ष रूप से जेल की सलाखों के पीछे भेजवाकर सामाजिक सरोकार की शानदार सफलता अपने जीवन में किए गए परोपकारी कार्यों की झोली में डाल दिया।
अभी पहले की आग बुझी भी न थी कि फिर एक घटना की पुनरावृत्ति हुई इस बार जहां जनता अमन चैन की सांस ले रही थी वहीं दूसरी तरफ डॉ0 साहब के जीवन में संघर्षों का सैलाब दस्तक दे रहा था ,सन 2015 को फिर मानवता के दुश्मन कुछ दरिंदों ने निर्ममता पूर्वक बलात्कार की घटना को अंजाम दिया,जिस घटना ने क्षेत्रीय जनता एवं पीड़ित परिवार उन दबंग अपराधियों से इतना भयभीत थे कि उक्त घटना की सूचना थाना तक पहुंचाना कोई मुनासिब नहीं समझा,तभी डॉक्टर साहब ने क्षेत्रीय सम्मान को संकट में देखते हुए आक्रामक रुख अख्तियार कर इस घटना का खुलासा करने की जिम्मेदारी की कमान अपने हाथों में लेकर अखंड आंदोलन का संकल्प लिया तथा चंद घंटों के पश्चात ही क्षेत्रीय पुलिस उस आंदोलन से प्रभावित होकर घटना का पर्दाफाश करते हुए बलात्कार के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल रवाना किया, यद्यपि इस घटनाक्रम से डॉ0 साहब के जीवन में संकट उत्पन्न हो गया परंतु उक्त संकट की परवाह किए बगैर डॉ0 साहब को अपने आंदोलन के जरिए किए गए परोपकार व उक्त मासूम अवला बालिका को प्राप्त हुए इंसाफ का पलड़ा शारीरिक संकट से भारी पड़ गया।
सब कुछ ठीक-ठाक एवं संघर्षरत चल रहा था कि इसी बीच डॉ0 साहब के दूसरे नंबर के भाई डॉ संतराम सिंह जो पेशे से लैब टेक्नीशियन थे,जो बड़े ही लगन व ईमानदारी से अपनी पैथोलॉजी (नवचेतना पैथोलॉजी) गौराबादशाहपुर में संचालित कर रहे थे, जिन्हें क्षेत्रीय बच्चे उन्हें चाचा नेहरू की तरह “अंकल जी” कहकर संबोधित करते थे,बड़े बुजुर्ग उनकी गंभीरता एवं उच्च विचारों से प्रभावित होकर उनको बड़े सम्मान की दृष्टि से देखते थे, जिनकी पत्नी का पूर्व में ही निधन होने के पश्चात भी अपने पथ पर अडिग रहें एवं ता उम्र विधुर का जीवन जीने के लिए ठोस रूप से संकल्पित थे, तथा समाज में आम जनमानस के बीच न्याय प्रिय एवं स्पष्टवादी विचारधारा की उपाधि प्राप्त की थी,जिनका दि0-31/ 11 /2015 को आकस्मिक निधन हो गया,जिसके कारण डॉ0साहब के जीवन में उफनाई किरणें पुनः धुंधली नजर आने लगी।
परंतु ईश्वर पर संपूर्ण भरोसा व सामाजिक चैतन्यता व सूझबूझ को ध्यान में रखते हुए पुनः डॉ0 साहब द्वारा समाज व आम जनमानस के बीच अपने आप को जवाब दहे बनाए रखने के लिए संपूर्ण भ्रष्टाचार के प्रति पूरे जोशो खरोश के साथ जनता को जागरूक किया जाता रहा, सब कुछ के पश्चात अपने मुल्क की आजादी एवं उनकी शहादत और कठिनाइयों को भी हमेशा स्मरण करते रहे और जन जागरण करते हुए आपने स्वयं के खर्चे से राष्ट्रीय पर्वों पर कार्यक्रम का आयोजन एवं शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि की रूपरेखा तैयार करना उनकी आदतों में शुमार था, यहां तक कि गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर कारागार में निरुद्ध गरीब,असहाय व मजलूम पुरुष व महिला बंदियों को अपनी टोलियों के साथ कारागार में प्रवेश कर मिष्ठान वितरण करना उनके प्रत्येक वर्ष का रचनात्मक कार्य था।
साधारण किसान परिवार में जन्म लेने के पश्चात भी हमेशा सामाजिक कार्यों में तल्लीन होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, परंतु जब जब उनके कानों में किसी मजलूम व असहाय व्यक्ति की आवाज पहुंचती थी, या किसी व्यक्ति के साथ शासन प्रशासन द्वारा अन्याय कार्य किया जाता था, तब तब वे आर्थिक स्थिति को दरकिनार कर शासन प्रशासन से सीधी लड़ाई लड़ कर जनता को न्याय दिलाने का कार्य करते रहे।
क्योंकि वर्तमान समय में राजनीतिक कैरियर की दिशा धन बल के कारण चर्चाओं में रहती थी,इसी वजह से क्षेत्रीय आम जनमानस की आंखों के तारे व प्राणों से प्रिय होते हुए भी राजनीति के क्षेत्र में किसी भी पायदान पर नहीं पहुंच सके, परंतु उनका स्वसंकल्प था कि ,यदि किसी दिन आम जनमानस के सहयोग से किसी महत्वपूर्ण वहदे पर आसीन हो गए तो समस्त जीवन जनता की निस्वार्थ सेवा में समर्पित रहने के लिए सहर्ष रूप से तैयार रहूंगा, डॉक्टर साहब के कठोर परिश्रम एवं लगन के पीछे समाज का ही हाथ नहीं था, बल्कि उनकी आंतरिक शक्तियों का समय-समय पर उनकी पत्नी श्रीमती उर्मिला देवी व उनके बच्चे दिग्विजय सिंह, रणविजय सिंह, धनविजय सिंह, दुर्ग विजय सिंह एवं कुमारी जयंती सिंह जागृत किया करते थे।
डॉक्टर साहब द्वारा किए गए कार्यों से जहां विपक्षी खेमा शक्ते में था वहीं प्रशासन के लोग भी डॉ साहब के द्वारा किए गए कार्यों से द्वेष की भावना रखते हुए, उनकी राह में रोड़ा बनकर शारीरिक मानसिक रूप से पीड़ा पहुंचाए जाने का बेसब्री से इंतजार किया करते थे, पूर्व में प्रशासन द्वारा उनके जीवन काल में दिए गए पीड़ा का दंश ,मुकदमें की पैरवी में भी उनके द्वारा कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जाता था, और समय-समय पर सक्षम न्यायपालिका के सम्मान में निर्धारित तिथियों पर पैरवी हेतु न्यायालय भी जाया करते थे।
बात उस समय की है जब डॉक्टर साहब अपने मुकदमें की पैरवी हेतु न्यायालय में उपस्थित थे, तभी दूरभाष के जरिए सूचना प्राप्त हुई कि उनके जीवनकाल में बचे हुए मजबूत स्तंभ उनकी माता जी श्रीमती प्यारी देवी का भी दि0- 23/07/ 2016 को आकस्मिक देहांत हो गया, अपने को सौभाग्यशाली मानते हुए अंतिम स्तंभ अपनी माता जी स्वर्गीय श्रीमती प्यारी देवी को कंधा दीए।
एक तरफ जहां परिवार की मुखिया व डॉक्टर साहब की माताजी के आकस्मिक निधन से पूरे राजपूत परिवार में मातमी माहौल बना हुआ था, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय महिला के साथ प्रसव पीड़ा के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोरसंड,गौरा बादशाहपुर जिला जौनपुर के स्वास्थ्य कर्मियों की घोर लापरवाही के कारण महिला के बच्चे की मृत्यु के संबंध में इंसाफ की पुकार की आवाज डॉ साहब के कानों में सुनाई पड़ी, तब भी डॉक्टर साहब अपने परिवार के इस दुखद पल की परवाह किए बग़ैर संघर्षों की लड़ाई में पुनः कूद पड़े, अपनी टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का जबरदस्त घेराव किया और उक्त घटना के संदर्भ में निष्पक्ष व सूक्ष्म जांच की मांग करने में दंभ भर दिया।
साथ ही साथ गौराबादशाहपुर परीक्षेत्र पिछड़ा होने के नाते केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा जनहित में जारी लाभांश योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का बीडा़ भी डॉक्टर साहब ने अपने कंधों पर उठाया, और वास्तविक पात्रता की श्रेणी में आने वाले पात्रों को विधवा पेंशन,वृद्धा पेंशन तथा राज्य आरोग्य निधि से गरीब रोगियों को इलाज का लाभ भी दिलवाया।
समय-समय पर अखंड भारत में निवास करने वाले सभी धर्मो,संप्रदायों के त्योहारों पर बराबर की भागीदारी करते हुए, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने हेतु शासन प्रशासन का सहयोग भी करते रहे, डॉक्टर राजपूत के छोटे भाई जैसराज सिंह भी इनके कार्यों एवं बलिदानों से प्रभावित होकर उनका भरपूर सहयोग करने का प्रयास करते थे, मगर पारिवारिक उत्तरदायित्व के निर्वहन की जिम्मेदारी को समझते हुए राजपूत परिवार के मान सम्मान व प्रतिष्ठा तथा हानि को ध्यान में रखते हुए, सब रजिस्ट्रार कार्यालय कलेक्ट्रेट जौनपुर में वसीका नवीस के रुप में संलग्न हो गए।
विततेे समय के साथ फिर एक बार गरीबों के साथ अन्याय की आवाज उनके कानों में पड़ी, ग्राम सभा बंजारेपुर का दबंग एवं मनबढ़ कोटेदार जो लगभग तीस वर्ष से गरीबों का हक खाकर गरीबों को ही गाली देता था, ऐसे दबंग कोटेदार से दो वर्षो के अथक प्रयास एवं संघर्ष से शासन-प्रशासन के विरोध के बावजूद भी गरीबों को न्याय दिलाने का कार्य किये,डॉक्टर साहब ने अपने इस 54 वर्ष के सफर में बहुत कुछ खोया,बहुत कुछ पाया, परंतु उनके भावनाओं जज्बों व हौसलों की दरख़्त से यही अनसुनी आवाज निकलती थी कि उन्हें आशा ही नहीं,बल्कि पूर्ण विश्वास है कि उनके द्वारा आम जनमानस के हितों के लिए किए गए कार्यों व तिलांजलि का परिणाम एक ना,एक दिन जनता उन्हें सौगात के रुप में अवश्य प्रदान करेगी।

जीत ही उनको मिली जो, हार से जमकर लड़े हैं।
हार के भय से डिगे जो,वे धराशायी पड़े हैं।
हर विजय संकल्प के पद पूजते देखे गए हैं-
वह किनारे ही बचे जो, सिंधु को बांधे खड़े हैं।।

संकलनकर्ता /लेखक-
श्री रतन कुमार मिश्रा (एडवोकेट)
पूर्व उपमंत्री दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ जौनपुर।

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