थाना अध्यक्ष ने बताया कि देशभर में लागू हुए नए आपराधिक कानून: FIR में देरी नहीं, 90 दिन में चार्जशीट, जानिए क्या-क्या बदलेगा

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आजमगढ़, सिधारी थानाध्यक्ष योगेंद्र बहुदार सिंह जी ने आज अपने कार्यालय सिधारी थाना कैम्पस में पत्रकारो ,महिला सशक्तीकरण टीम, और जिले के समाजसेवियो के साथ जागरूकता कार्यक्रम करके नई कानून की धाराओं में हुए बदलाव को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज से देशभर में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं: भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य संहिता (BSS). इन नए कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित होगी जिसमें ‘जीरो FIR’, ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना, ‘SMS’ (मोबाइल फोन पर संदेश) के जरिये सम्मन भेजने जैसे बदलाव शामिल हैं। तलाशी और जब्ती समेत सभी जघन्य अपराधों के घटना स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान भी इसमें शामिल हैं। किसी भी मामले में मुकदमा/सुनवाई पूरी होने के 45 दिन के भीतर फैसला सुनाया जाएगा।

थानाध्यक्ष ने बताया कि 35 पुरानी धाराओं में बदलाव किया गया है और 9 नई धाराएँ जोड़ी गई हैं। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों से कानून प्रणाली और अधिक प्रभावी और कुशल बनेगी और अपराधों का दमन करने में पुलिस को मदद मिलेगी।

नए कानूनों के मुख्य बिंदु:

जीरो FIR: अब कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस थाने में जीरो FIR के तहत प्राथमिकी दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हुआ हो. इससे कानूनी कार्यवाही शुरू होने में देरी नहीं होगी. 15 दिन के भीतर मामला संबंधित थाना को ट्रांसफर करना होगा.
चार्जशीट और फैसला: नए कानूनों के तहत आपराधिक मामलों में 90 दिन के भीतर चार्जशीट फाइल करनी होगी और पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय करने होंगे. सुनवाई पूरी होने के 30 दिन के भीतर फैसला सुनाया जाएगा.
मॉब लिंचिंग: नए कानून में भीड़ के हत्‍या करने पर नई धाराएं जोड़ी गई है. मॉब लिंचिंग के मामले में 7 साल की कैद या उम्रकैद या फांसी की सजा का प्रावधान है.
राजद्रोह नहीं, अब देशद्रोह: नए कानून में संगठित अपराधों और आतंकवाद के कृत्यों को परिभाषित किया गया है. इसमें राजद्रोह की जगह देशद्रोह को रखा गया है.
महिलाओं और बच्चों के लिए कानून: महिलाओं-बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को न्‍याय संहिता में कुल 36 धाराओं के तहत रखा गया है. किसी बच्चे को खरीदना और बेचना जघन्य अपराध बनाया गया है और किसी नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के लिए मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान जोड़ा गया है. दहेज हत्या और दहेज प्रताड़ना को धारा 79 और 84 में परिभाषित किया गया है. शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने के अपराध को दुष्‍कर्म से अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है.
दुष्कर्म: दुष्कर्म की स्थिति में पीड़िता का बयान कोई महिला पुलिस अधिकारी उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट 7 दिन के भीतर देनी होगी. अपराधी को अधिकतम आजीवन कारावास और न्यूनतम 10 वर्ष कैद की सजा का प्रावधान है. वहीं, 16 साल से कम आयु की पीड़ित से दुष्कर्म किए जाने पर 20 साल का कठोर कारावास, उम्रकैद और जुर्माने का प्रावधान है.

थानाध्यक्ष ने बताया कि नई धाराओं में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, साइबर अपराध, और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों से जनता को सुरक्षित और बेहतर जीवन मिलेगा।

इस कार्यक्रम में इंस्पेक्टर योगेन्द्र बादुर सिंह, उप निरीक्षक भगत सिंह, सुरेन्द्र नाथ, खूशबू सिंह, हेड कांस्टेबल जयराम तिवारी, पप्पू जी, आलोक चौधरी, कास्टेबल मुकुन्दकाल मिश्रा, संजय सिंह, दीवान चन्द आदि उपस्थित रहे।

थानाध्यक्ष ने जनता से अपील की कि वे नई कानून की धाराओं के बारे में जागरूक रहें और कानून का पालन करें। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन जनता की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है और किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए पुलिस प्रशासन हमेशा तैयार है reporting by S.K Sharma Azamgarh

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