जौनपुर :- तकरीबन एक माह से लॉक डाउन के कारण ठहरी हुई जिंदगी अब सोमवार से पटरी पर लौटती नजर आएगी। शासन के निर्देशों के बाद कई ऐसे कार्यों को शुरू कराने की तैयारी है, जिससे जीवन की गाड़ी को रफ्तार मिलेगी। सरकारी दफ्तरों को 33 फीसदी उपस्थिति के साथ खोलने का आदेश हो चुका है। औद्योगिक इकाइयों का संचालन आरंभ होगा तो मनरेगा के तहत काम भी कराए जा सकेंगे। इन कार्यों के आरंभ होने से मजदूर तबके को सीधा फायदा होगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा केंद्रों के माध्यम से सरकार की सेवाओं को गांवों तक ऑनलाइन पहुंचाने की कवायद भी आरंभ कर दी गई है। इसके लिए संचालकों को पास जारी किए जा रहे हैं। इन सेवाओं की शुरुआत के साथ यह शर्त भी लगाई गई है कि हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, हैंडवॉश और सैनिटाइजर जैसी जरुरतों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
डीएम दिनेश कुमार सिंह बताया कि 20 अप्रैल से कार्यालयों में कार्य प्रारंभ होगा। कार्यालयाध्यक्ष यह सुनिश्चित करेंगे कि जो आवश्यक स्टाफ है उसी को बुलाएंगे और यह संख्या एक तिहाई से अधिक न हो। कार्यालय में सैनेटाईजेशन की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे। क्योंकि लाकडाउन 03 मई तक लागू है। अतः अन्य किसी को कार्यालय में अपने किसी कार्य से आने की अनुमति नहीं होगी। शासन के आदेशानुसार पुलिस विभाग, नगर विकास विभाग, होमगार्ड विभाग, मौसम विभाग, आकस्मिक सेवाएं, आपदा प्रबंधन, कारागार विभाग में यह प्रतिबन्ध लागूं नहीं होंगे।
उधर मेडिकल कालेज , सिटी स्टेशन के पास बन रहे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हो जायेगा। गाँवो में मनरेगा के तहत कार्य कराया जायेगा। फैक्ट्रियों की बंद पड़ी मशीने फिर से रफ़्तार पकड़ लेंगी। वाराणसी -सुल्तानपुर फोर का काम शुरू होगा। सुबह छह बजे से 11 बजे दिन तक खाद बीज और यंत्रों के दुकानें खुलेगी।
ग्राम पंचायत स्तर के जनसेवा केंद्रों को 20 अप्रैल से संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व तथा ईडीएम यह सुनिश्चित करेंगे कि जन सेवा केंद्र ग्राम पंचायत स्तर पर ही संचालित हो और 10.00 बजे से 5.00 बजे तक अवधि में कार्य करेंगे। सोशल डिस्टेंसिग का पालन करेंगे। अपने जन सेवा केंद्र के आगे गोले 1-1 मीटर दूरी पर बनवा देंगे। उसमें ही लोग खड़े हो। सैनेटाईजर की पूर्ण व्यवस्था रखेंगे। किसी भी तरह से केंद्रों पर भीड़ न लगे यह हर हाल में केंद्र प्रभारी को सुनिश्चित करना होगा। इससे किसानों को गेहूं क्रय हेतु पोर्टल पर पंजीकरण कराना और अन्य कार्यों की सुविधा हो जाएगी। उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी अपने भ्रमण के दौरान निरीक्षण करें और देखें कि जन सेवा केंद्र उसी स्थान पर चले जहां के लिए वह अधिकृत हैं तथा हर सेवा के लिए जो निर्धारित शुल्क है उसका बोर्ड लगा है कि नहीं।
