समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जिला अध्यक्ष राम शकल यादव के अध्यक्षता में किसान की विभिन्न समस्याओं को लेकर बैठक हुई सम्पन्न

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अम्बेडकरनगर

समाजवादी पार्टी कार्यालय अम्बेडकर नगर में जिला अध्यक्ष राम शकल यादव के अध्यक्षता में किसान की समस्याओं को लेकर एवं आगामी 7 दिसंबर को किसान यात्रा को लेकर बैठक की गई।
जब भी खेती किसानी का जिक्र आता है, किसान की आमदनी की बात होती है देश में अनाज के बंपर उत्पादन की बात होती है, हरित क्रांति की बात चलती है।
देश में हाल ही में लागू हुए तीनों कृषि कानूनों को केंद्र सरकार किसानों और कृषि की किस्मत बदलने वाला बता रही है लेकिन किसान संगठन और विपक्ष इसे किसानों का डेथ वारंट बता रहे। देश का हर दूसरा किसान कृषि कानूनों के विरोध में है ।
कृषि प्रधान देश में 27 सितंबर 2020 की तारीख इतिहास में दर्ज हो गई है। राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद तीनों नए कृषि बिल देश में कानून बनकर लागू हो गए हैं। कृषि सुधार के लिए लागू इन कानूनों का कई राज्यों में विरोध जारी है, वहीं पंजाब और हरियाणा के किसान संघटन किसानों के साथ दिल्ली बॉर्डर पर घेरा डाले हैं । जबकि नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को ये समझाने कि कोशिश में है कि बिल उनके हित में हैं और इससे कृषि का भविष्य बदल जाएगा।
किसानों को डर है कि नए कानूनों के बाद उन्हें अपनी फसल कम कीमत पर खुले मार्केट में बेचनी पड़ेगी,विरोध करने वालों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था और मंडी (एपीएसपी) के खत्म होने, कॉरपोरेट के हावी होने का डर है।
केंद्र की एनडीए सरकार कोरोना के चलते लॉकडाउन लगने के बाद तीन कृषि कानूनों को अध्यादेश (agriculture act) के रुप में लाई, जिन्हें 14 सितंबर से शुरु हुए संसद के मानसून सत्र में भारी हंगामे के बीच पास कराया गया। किसान संगठन मानसून सत्र के पहले दिन से विरोध कर रहे हैं, जबकि विपक्ष ने सदन में बिना चर्चा पर्याप्त चर्चा न कराए जाने, संसद की सेलेक्ट कमेटी (सुधार के लिए) को बिल न भेजे जाने को सरकार की तानाशाही और अलोकत्रांतिक बताया। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया कई राज्यों में किसान आज भी प्रदर्शन कर रहे हैं वो बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस बैठक में पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त, पूर्व विधायक विशाल वर्मा, भावी जिला पंचायत पद प्रत्याशी कटेहरी4 स्वतन्त्र कुमार, सपा नेत्री प्रिया यादव आदि लोग मौजूद रहे।

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