मुंबई :कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) को मात देने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया है. इस दौरान जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को छोड़कर किसी की आवाजाही पर प्रतिबंध है. इसकी जद में प्रवासी मजदूर (Migrant labours) भी हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी दूसरे राज्यों से आए हजारों मजदूर फंसे हुए हैं. अब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने इन प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्थान स्पेशल ट्रेनों के जरिये भेजने के लिए पीएम मोदी (Narendra Modi) को पत्र लिखा है. पत्र में सीएम ठाकरे ने पीएम मोदी से मांग की है कि इस संबंध में अप्रैल के अंत तक केंद्र सरकार की ओर से गाइडलाइंस जारी की जाएं.
स्पेशल टीम ने राज्य को दिए सुझाव
वहीं केंद्र सरकार की स्पेशल टीम ने महाराष्ट्र के दौरे के बाद राज्य सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं. उनके अनुसार राज्य को डोर-टू-डोर सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित करने, अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने, हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सख्ती लागू करने, अधिक जोखिम वाले रोगियों पर ध्यान केंद्रित करने, स्लम क्षेत्रों में संक्रमण फैलने से रोकने, संदिग्ध मामलों को शिफ्ट करने और उन गरीबों को भोजन के वितरण के लिए एक नीति बनाने की आवश्यकता है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं.
1.25 लाख चीनी मिल मजदूरों को भी भेजेगी सरकार
बता दें कि इससे पहले 17 अप्रैल को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में फंसे महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों के मजदूरों को उनके गांव भेजने का ऐलान किया था. राज्य सरकार के अनुसार राज्य में फंसे 1.25 लाख चीनी मिल मजदूरों को उनके गांव जाने की इजाजत दी जाएगी. ये सभी 1.25 लाख मजूदर महाराष्ट्र के ही बीड और अहमदनगर जिलों के रहने वाले हैं. वह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में चीनी मिल में काम कर रहे थे. ये सभी मजदूर गन्ना सीजन में पश्चिमी महाराष्ट्र में 6 महीनों के लिए चीनी मिल में काम करने जाते हैं.
महाराष्ट्र सरकार ने मजदूरों के परिवार संबंधी परेशानियों और उनकी नाराजगी को देखते हुए उन्हें घर भेजने का फैसला लिया है. यह भी कहा जा रहा है कि सरकार इन्हें घर भेजने से पहले उनकी पूरी मेडिकल और कोविड 29 जांच कराएगी. सब ठीक रहने पर ही उन्हें घर भेजा जाएगा. बता दें कि पिछले दिनों मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर घर भेजे जाने की अफवाह के चलते सैकड़ों मजदूर एकत्र हुए थे. उन पर पुलिस ने लाठी भी बरसाई थी.
