जनपद म ऊ मधुबन की बागी धरती पर आजादी के आठ दशक बाद अब विकाश की किरण झिल मिलाने लगी है।आजादी के महासंग्राम में अपनी अमिट पहचान बनाने वाला राजा माधो मल्ल की विरासत सम्हाले मधुबन की उपेक्षा आजादी के बाद की तत्कालीन सरकारें करती रही है।पहली बार बहुजन सरकार में राजस्व मन्त्री बने राजेन्द्र कुमार ने मधुबन को तहसील का दर्जा दिलाकर विकाश की नींव की पहली ईंट मजबूती से रख दिया!,लेकिन फिर यह इलाका सियासी हादसे का शिकार हो गया!,मुलायम सिंह सरकार में मधुबन के उत्तरी सीमा पर घाघरा नदी में दो कीलो मीटर लम्बा पूल का प्रस्ताव पास हुआ वह भी आज तक अधूरा है।तमाम विधायक मन्त्री इस इलाके से होते रहे लेकिन किसी ने भी विकाश को तवज्जो नहीं दिया! सिर्फ दिवंगत नेता कल्पनाथ राय जी ने शहीद रोड तथा शहीद स्मारक के साथ देवरांचल में सड़कों का निर्माण कराकर स्वस्थ परम्परा को आगे बढ़ाया।आज वर्तमान सरकार मे मधुबन को नगर पंचायत का दर्जा जरूर दिलाया गया लेकिन विकाश जिस गति से होना चाहीए आज तक नहीं हो सका।हजारों एकड़ में फैला ताल रतोय अपनी खुबसूरती तथा सैलानी पक्षियों के आगमन के साथ ही पौराणिक आभा से आच्छादित होने के बाद भी उपेक्षित रहा है। ताल रतोय से महज पांच कीलो मीटर दक्षिण ग्राम इब्राहिम पट्टी बलिया निवासी पूर्व प्रधान मन्त्री चन्द्रशेखर जी के कार्य काल में ताल रतोय को पर्यटन स्थल बनाए जाने की चर्चा जोरों पर थी लेकिन फाईल ठंडे बस्ते में ही रह गयी है। वर्तमान समय में एक बार फिर सर्वे का काम शुरू हो गया है! एक सौ तीस करोड़ का बजट भी पास हो जाने की सूचना है।ताल रतोय के पर्यटन स्थल बन जाने से मधुबन के विकाश में एक नया आयाम जुड जायेगा। पूरी खबर विभागीय सूत्रों से मिलने के बाद लिखा जायेगा। इतनी खबर सूत्रो के हवाले से
के मास न्यूज तहसील संवाददाता
कैलाश चंद मऊ की रिपोर्ट
