फूलपुर,अंबारी/आजमगढ़, स्थानीय क्षेत्र के रम्मौपुर घटवा में काली मां आजीविका स्वयं सहायता समूह के तहत समूह की महिलाओं ने अनेक रूप के स्वादिष्ट ढूंढा, चिक्की , रामदाना, लड्डू, भेली, रेवरा,तिल लड्डू ,लाई का स्टाल लगाया।
कि भारत की परंपराओं गांव की निर्मित वस्तुएं खासकर खाद्यान्न से जुड़ी हुई है वस्तुओं का अदभुत व आलौकिक इतिहास रहा है । भगवान श्री कृष्ण के जमाने से मिश्री और गुड़ की परंपरा चली आ रही है हालांकि, इसके मुकाबले बहुत-सी वस्तुएं बाजार में बनी परंतु आज भी गांव की बनी देसी वस्तुएं अपनी एक अलग छाप छोड़ती है और रोजगार की दुनिया में भी एक अलग मुकाम हासिल करती हैं। ऐसे में सरकार द्वारा चलाए जा रहे आजीविका स्वयं सहायता समूह के तहत गांव की महिलाएं एकत्र होकर अपना समूह बनाकर एक नया पहचान बनाती है।
जिस तरह से काली मां आजीविका स्वयं सहायता समूह रम्मौपुर घटवा के द्वारा स्वादिष्ट मकर संक्रांति फूड प्रोडक्ट का स्टाल लगाकर यह साबित कर दिया कि, हुनर और व्यवसाय अगर एक साथ जुड़ जाए तो तरक्की निश्चित है। इस स्टाल का उद्घाटन आजीविका स्वयं सहायता मिशन के ब्लॉक मैनेजर रॉबिन के हाथों से किया गया। इस मौके पर बिंदु मौर्य , रेनू मौर्य ,सुमन मौर्य, व कार्यक्रम में सहयोग कर रहे संदीप मौर्य के साथ अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
काली माँ आजीविका स्वयं सहायता समूह रम्मौपुर के द्वारा लगाया गया स्वादिष्ट मकरसंक्रांति प्रोडक्ट का स्टॉल
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