मण्डलायुक्त ने ग्रामसभा की भूमि को हाईकोर्ट के फर्जी आदेश का हवाला देते हुए कूटरिचत ढंग से अपने नाम अंकित कराये जाने पर सम्बन्धितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का दिया निर्देश
अपर आयुक्त की जाॅंच में लाभान्वित पक्ष के साथ ही तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो पूर्णतया दोषी पाये गये
हाई कोर्ट के तथाकथित आदेश में उल्लिखित मुकदमा अन्य जनपद का पाया गया, प्रकरण लालगंज तहसील के मौजा रज्जबपुर का है
आज़मगढ़ मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी के निर्देश पर जनपद आज़मगढ़ की तहसील लालगंज के अन्तर्गत ग्रामसभा रज्जबपुर में सरकारी भूमि के सम्बन्ध में हुई जाॅंच में बड़े पैमाने पर कूटरचना कर उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कतिपय लोगों द्वारा अपने नाम करा लिये जाने का मामला प्रकाश में आया है। मण्डलायुक्त श्रीमती त्रिपाठी ने इस स्थिति पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए उपजिलाधिकारी लालगंज को निर्देशित किया है कि कूटरचित ढंग से कराये गये अमलदराम को तत्काल खारिज कर उसे मूल खाते में दर्ज किया जाय तथा अत्यन्त सुनियोजित ढंग से फ्राड कर लाभ लेने वालों एवं तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो राममूरत राम के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराते हुए विधि सम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाय। इस सम्बन्ध में मण्डलायुक्त ने बताया कि गत दिवस उनके समक्ष इस आशय का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था कि तहसील लालगंज के मौजा रज्जबपुर स्थित ग्रामसभा की कई आराजियात को कतिपय लोगों द्वारा कूटरचना करके अपने नाम दर्ज करा लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जाॅंच अपर आयुक्त (प्रशासन) अनिल कुमार मिश्र से कराई गयी तो पाया गया कि गांव के कई गाटों पर गांव के पत्तू, झम्मन, सोमारू पुत्रगण पुरुषोत्तम व बचाऊ पुत्र सामारू आदि के नाम भू अभिलेखों में अंकित हैं, परन्तु जोत चकबन्दी आकार पत्र 41 व 45 में उक्त आराजियात पशुचर, भीटा, श्मशान, कब्रिस्तान, ऊसर, नवीन परती आदि खातों की जमीन है। इस प्रकार यह सारी जमीन ग्रामसभा खाते की रही है, जिस पर इन लोगों द्वारा कूटरिचत तरीके से अपना नाम अंकित करा लिया। अपर आयुक्त श्री मिश्र की जाॅंच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उक्त अंकन को उपजिलाधिकारी लालगंज द्वारा विगत 26 फरवरी 1993 व 6 अगस्त 1993 को निरस्त कर दिया गया जिसके विरुद्ध उन लोगों ने आयुक्त न्यायालय में निगरानी दाखिल किया था जो विचाराधीन थी। इसी दौरान सोमारू इत्यादि ने मा.उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या 18387/2005 सोमारू बनाम अपर आयुक्त आज़मगढ़ का हवाला देते हुए एक फर्जी आदेश की अमलदरामद अंकित कर दी गयी, परन्तु जाॅंच में पाया गया कि यह रिट याचिका सोमारू द्वारा प्रस्तुत नहीं की गयी है और न ही उसमें कोई आदेश पारित हुआ है, बल्कि वह रिट याचिका संख्या 18387/2005 जनपद कौशाम्बी की रिट याचिका है। मण्डलायुक्त कनक त्रिपाठी ने बताया कि जाॅंच में पाया गया कि बिना किसी आदेश के कूटरचित तरीके से अभिलेखों में अमलदरामद कराया गया है। उन्होंने कहा कि मा. उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दते हुए अमलदरामद कराया जाना निःसन्देह अपराध है। उन्होंने इस स्थिति पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मामले अमलदरामदकर्ता तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो राममूरत राम तथा लाभान्वित पक्ष जिनके द्वारा कूटरचनाओं के आधार पर यह अमलदरामद कराया है, पत्तू, सोमारू, जनार्दन, ओमप्रकाश दारा, जनार्दन, दलजीत, चन्द्रादेवी आदि दोषी हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी लालगंज को निर्देशित किया कि तत्काल अमलदरामद खारिज कर उक्त आराजियात को मूल खाते में दर्ज किया तथा सभी दोषियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर विधि सम्मत कार्यवाही की जाय।
