स्वामित्व योजना के तहत ग्राम सभा बरामदपुर में गाटा संख्या 1058 क में‘घरौंदी का खेल उजागर, पीड़ितों ने लेखपाल अनिल कुमार पाण्डेय पर लगाया आरोप

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सुल्तानपुर

पात्रों के नाम काटकर अपात्रों को फायदा देने के लगाये गये आरोप ।

पीड़ितों ने घरौंदी में सुधार कर पात्रों को न्याय दिलाने की शासन से लगाई गुहार ।

मामला ग्राम पंचायत बरामदपुर थाना अखंड नगर तहसील कादीपुर जनपद सुल्तानपुर का है ,जहां पर सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को संपत्ति का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से चल रही घरौदीं प्रक्रिया ही अब विवादों में घिर गई है। विकास खण्ड अखंड नगर के ग्राम सभा बरामदपुर में घरौंदी सर्वे को लेकर ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर धांधली और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। आरोप है कि सर्वे के दौरान सोची समझी गड़बड़ियां की गईं, जिससे गांव में आक्रोश का माहौल है।

मामले को गंभीर बताते हुए ग्राम प्रधान उदयभान ने उपजिलाधिकारी, कादीपुर को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि घरौंदी के प्रपत्र-5 में पात्र लोगों के नाम सूची से हटाकर अपात्र और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया। इतना ही नहीं, आपत्तियां लिए बिना ही उनका निस्तारण कागजी औपचारिकता बनाकर कर दिया गया।

शिकायत के अनुसार आबादी गाटा संख्या 1058 क में राजेश कुमार गौतम और सुरेश गौतम के मकान, सेहन और पेड़ों की जगह सर्वेश कुमार सिंह का नाम दर्ज कर दिया गया। इसी प्रकार धर्मराज यादव के पक्के मकान, सेहन और गैराज को रत्नेश प्रताप सिंह के नाम अंकित कर दिया गया, जबकि धर्मराज यादव का नाम उनके छोटे भाई राजित राम यादव के घर में दर्ज कर दिया गया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि रामसरन और त्रिभुवन के घर, सेहन,अन्य निर्माण और स्थित आबादी का शेष भाग व गड्ढा वाली जमीन, जहां करीब दस घरों का नापदान और बरसाती पानी निकलता है, उसे अशोक कुमार सिंह का पक्का मकान दिखाकर दर्ज कर दिया गया, जिससे गांव में जल निकासी की समस्या खड़ी हो सकती है। आबादी से होकर निकलने वाले आम रास्ते को आवेश प्रताप सिंह के नाम दर्ज कर दिया गया साथ ही वंशराज गौतम के घर के बगल गाटा संख्या 1057 नंबर की आबादी अरुण कुमार सिंह के नाम दर्ज कर दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर ड्रोन सर्वे के नक्शे की बजाय हाथ से नक्शा बनाकर घरौनी की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, मकान किसी और का घरौंदी किसी और की दर्ज कर दी गई है।जिससे पूरी कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस तरह की प्रक्रिया से पीड़ित गांव के लोगों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए जिन पात्र ग्रामीणों के अधिकार छीने गए हैं, उन्हें न्याय दिलाया जाए। जिलाधिकारी और उप जिला अधिकारी के निर्देश पर मौजूदा लेखपाल द्वारा भौतिक निरीक्षण करके रिपोर्ट भी भेज दी गई है। लेकिन एक सप्ताह के बाद भी अभी पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई है। अब सबकी निगाहें शासन की कार्यवाही पर टिकी हैं कि स्वामित्व योजना में उठे इन गंभीर आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है। पीड़ितों को न्याय मिलेगा अथवा घरौंदी प्रक्रिया भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जायेगी।

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