केराकत/जौनपुर प्रदेश सरकार द्वारा कुछ संस्थानों के निजीकरण से जहां सरकारी कर्मचारियों में आक्रोश देखने को मिलता है वहीं आम जनमानस खुश नजर आ रहा है। वजह यह है कि सरकारी तंत्र उनकी सुनते ही नहीं और बिना लिये दिये कोई काम भी नहीं करते। ऐसे उदाहरण बहुत सारे मिल जाएंगे। अब ताजा मामला केराकत का है। यहां के सरायबिरू चौराहे पर दर्जनों दुकानों में नाली का पानी घुसने से लाखों का नुकसान हो गया।
बीती रात घनघोर बारिश से नाली का पानी उपर आ जाने से दर्जनों दुकान में पानी घुस गया जिसमें यादव मिष्ठान भंडार, कृष्णा स्टूडियो, फर्नीचर की दुकान, रेडीमेड कलेक्शन व बाल चिकित्सा केंद्र में काफी पानी भर जाने से काफी नुकसान हो गया। बाल चिकित्सा केंद्र के वर्मा मेडिकल में भी पानी भर जाने से काफी दवाइयां खराब होने से नुकसान हो गया। बगल में बहादुर खा के निर्माण कार्य से निकले मिट्टी के बहकर आने से सभी दुकानदारों के नुकसान में बढ़ोतरी हो गयी। वहीं गोलावार्ड के सभी भूधरों में पानी भर गए व बाईपास रोड पर शर्मा लैपटॉप की दुकान में पानी भरने से काफी नुकसान हुआ।
लोगों का कहना है कि अगर ठीक से नालियां साफ रहती और पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था होती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। सरकारी तंत्र लूट, खसोट, भ्रष्टाचार में व्यस्त है इसलिए विकास के नाम सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति होती है। कोरोना काल में वैसे ही व्यापारियों का भट्ठा बैठ गया है ऊपर से इस तरह के नुकसान से हम लोग बर्बाद हो जाएंगे। जनप्रतिनिधि भी हमारी सुधि लेने नहीं आएंगे, जब वोट लेना रहता है तब ही दण्डवत रहते है उसके बाद उनकी गणेश परिक्रमा तो हमको ही करनी है बावजूद इसके बिना लिये दिये काम नहीं हो पाता।
