केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी

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गाजियाबाद: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। किसान अपनी मांगों को लेकर सिंघु बॉर्डर पर तीन महीने से ज्यादा दिनों से डटे हुए हैं। संगठन के नेताओं का कहना है कि इस बार वे पूरी तैयार करके यहां आये हैं। जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करेगी। वे लौटकर वापस जाने वाले नहीं हैं। किसान आंदोलन को दिसंबर तक चलाने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन ने किसानों से धरनास्थल पर गर्मी और बारिश दोनों मौसमों को ध्यान में रखते हुए टेंट लगाने को कहा है, जिससे उन्हें आगे आने मौसमों में किसी भी तरह की परेशानी न हो।

सरकार ने किसानों को बातचीत के लिए कोई न्योता नहीं भेजा: राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के अनुसार सरकार ने अभी तक किसानों को बातचीत के लिए कोई न्योता नहीं भेजा है, इससे सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों से लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नवंबर-दिसंबर तक खिंच सकता है, इसलिए धरना स्थ्ल पर टेंटों को मौसमों के अनुसार तैयार किया जाए। राकेश ने बताया कि 26 मार्च को बंद को सफल बनाने के लिए ट्रांसपोर्टर और दुकानदारों को भी शामिल किया जाएगा।

मार्च माह का शेड्यूल जारी, यहां देखें पूरा कार्यक्रम

15 मार्च को किसान कॉरपोरेट विरोध दिवस मनाएंगे।

17 मार्च को मजदूर संगठनों के साथ भारत बंद की सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

19 मार्च को एफसीआई और खेती बचाओ कार्यक्रम के तहत देशभर की मंडियों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

23 मार्च को शहीद भगत सिंह के शहीदी दिवस पर युवा किसान आंदोलन की कमान संभालेंगे।

26 मार्च को भारत बंद होगा।

28 मार्च को देशभर में होलिका दहन में किसान विरोधी नए कानूनों की कॉपी जला कर विरोध किया जाएगा
29 मार्च फूलों की होली खेले जाएगी
रिपोर्टर राहुल यादव

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