केराकत / जौनपुर कामियाबी किसी परिचय का मोहताज नही होता है इस कहावत को चरितार्थ करता डोभी का इतिहास जो देश ही नही बल्कि विश्व पटल पर अपनी मिट्टी की खुशबू को आज भी बिखेरता हुआ नजर आता है ! हम बात कर रहे केराकत तहसील के डोभी क्षेत्र के बोड़सर गॉव में 23 मार्च 1903 में जन्मे प्रो.डॉ.राम उग्रह सिंह की
आपको बताते चले कि प्रो.डॉ राम उग्रह सिंह पुत्र राम जग सिंह बचपन से ही पढ़ने लिखने का बहुत शौक था वही बड़े पिता शिवपत सिंह के पुत्र बटुक सिंह का भी पढ़ने लिखने का बहुत शौक था! बच्चों के पढ़ने की इच्छा शक्ति को देखकर शिवपत सिंह उस समय के शिक्षित और विद्वान के रूप में विख्यात सेनापुर गांव में जाकर ठाकुर मुखराम सिंह से अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए आग्रह किए पर ठाकुर मुखराम सिंह ने बोड़सर जाने से मना कर दिए तो ठाकुर शिवपत सिंह बोले कि जब तक आप हमारे बच्चों को पढ़ाने नहीं जाएंगे तब तक मैं आपके घर के सामने बैठा रहूंगा तत्पश्चात ठाकुर मुखराम सिंह बोड़सर जाने का फैसला किये वहां पहुचकर जब बच्चों से मिले तो उनका हुनर देखकर आश्चर्यचकित रह गए ! समय बीतता गया साल 1927 में प्रो.डॉ. राम उग्रह सिंह ने एम ए एलएलबी की पढ़ाई पूरा कर वकालत करने लगे! कानून के विषय में उनका पहला लेख पढ़ हावर्ड कॉलेज आफ लॉ से बुलावा आ गया उन्होंने वहां जाकर पढ़ाई की और देश प्रेम की भावना उन्हें वापस लखनऊ आने पर मजबूर कर दी !यहां 1938 से 1956 तक पढ़ाते रहें उनकी कानूनी विद्वता की जानकारी पाकर नेपाल के राजा ने 50 के दशक के अंत में उन्हें अपनी संविधान निर्मात्री सभा में शामिल कर लिया था ! उन्होंने नेपाल का संविधान बनाने में भूमिका निभाई
प्रो.डॉ. राम उग्रह सिंह आजीवन हावर्ड कॉलेज ऑफ लॉ के स्टूडेंट यूनियन के चेयरमैन भी रहे ! लविवि में विधि विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो.डॉ. राम उग्रह सिंह भारत में विधि की पढ़ाई के शिल्पी रहे ! उन्होंने दिल्ली और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में विधि विभाग को स्थापित किया था विश्वविद्यालय के इतिहास में वे एक अद्भुत नगीना रहे पर अफसोस होता है कि इतनी बड़ी हस्ती होने के बाद भी उनका पैतृक गॉव बोड़सर व डोभी क्ष्रेत्र उपेक्षा का शिकार है यहां तक कि उनके नाम पर बना हुआ डॉ राम उग्रह सिंह पोखरा इंटर कालेज आज भी उपेक्षा का शिकार है जो एक सोचनीय विषय है गॉव के ही समाजसेवी व तिरंगा यात्रा के संयोजक अजीत सिंह हर वर्ष 15 अगस्त को प्रो.डॉ.राम उग्रह सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर तिरंगा यात्रा निकालते है
इन विषयों को किया स्थापित
प्रो. डॉ.रामउग्रह सिंह ने पब्लिक इंटरनेशनल लॉ ,कंपनी लॉ, विधि इतिहास ,लीगल रेमेडीज, कराधान एवं श्रमिक कानून को विधि संकाय में स्थापित किया था उन्होंने दो ला जर्नल द फेडरलिस्ट और इंडियन ला भी शुरू किये !विधि के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहे प्रो.डॉ राम उग्र सिंह का 1957 में उनका निधन हो गया
