आर्मी आफिसर बन कर करना चाहती हूँ देश की सेवा : अंशिका सिंह
सुल्तानपुर:
परिस्थितियां चाहे जितनी भी प्रतिकूल हों, यदि मजबूत इरादे और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो हर मंजिल को पाया जा सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है सुल्तानपुर जिले के अखंडनगर ब्लॉक अंतर्गत बिलवाई माधोपुर ग्राम सभा की रहने वाली प्रतिभावान बेटी अंशिका सिंह ने। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संघर्षों के बीच अंशिका ने बॉक्सिंग के खेल में अपनी मेहनत के दम पर एक अलग मुकाम हासिल किया है और उनका सपना देश की सेवा के लिए आर्मी ऑफिसर बनने का है।
अभावों के बीच बॉक्सिंग रिंग में गाड़ा झंडा
श्री विश्वनाथ इंटर कॉलेज, कलान में 12वीं कक्षा की छात्रा अंशिका सिंह पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, विशेषकर बॉक्सिंग में गहरी रुचि रखती हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर पहले जिला स्तर की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने मंडल स्तर पर भी अपनी शानदार खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया।
मंडलीय स्तर पर परचम लहराने के बाद अंशिका ने प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। हालांकि, इस बार वह शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गईं, लेकिन उनकी हिम्मत और हौसला जरा भी नहीं डगमगाया है। अंशिका का मानना है कि हार से निराश होने के बजाय गलतियों से सीखकर और अधिक मेहनत करना ही असली विजेता की पहचान है।
संघर्षों से भरी जीवन यात्रा और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अंशिका का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। लगभग 10 वर्ष पहले उनकी माता का साया उनके सिर से उठ गया था। उनके पिता पवन कुमार सिंह एक टोल प्लाजा पर टोल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं और मात्र 15,000 रुपये मासिक वेतन पर काम करते हैं। इस सीमित आय में पूरे परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद चुनौतीूर्ण है।
परिवार में तीन बहनें और एक भाई हैं। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। वर्तमान में घर में उनके पिता, उनसे छोटी एक बहन और एक भाई, कुल चार सदस्य ही साथ रहकर जीवन गुजार रहे हैं। इतनी आर्थिक तंगी के बावजूद पिता ने बच्चों की शिक्षा और खेलकूद में कोई कमी नहीं आने दी।
इन सबका मिल रहा है भरपूर सहयोग
अपनी इस सफलता और सफर का श्रेय अंशिका किसी एक व्यक्ति को नहीं देतीं। उनका कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचने में उनके पिता के संघर्ष, उनके मामा के मार्गदर्शन, विद्यालय के प्रबंधक और सभी गुरुजनों का अमूल्य योगदान रहा है। इन सबका सामूहिक सहयोग ही है जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आर्मी ऑफिसर बनकर देश सेवा का है लक्ष्य
अपनी असफलताओं से सीख लेकर भविष्य की तैयारी में जुटीं अंशिका सिंह का मुख्य लक्ष्य भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना है। उनका कहना है कि “मैं आर्मी ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं और इसके लिए मुझे चाहे जितनी भी कड़ी मेहनत क्यों न करनी पड़े, मैं पीछे नहीं हटूंगी।”
अंशिका सिंह की यह कहानी आज के युवाओं एवं बालिकाओं के लिए एक मिसाल है, जो यह सिखाती है कि साधन भले ही सीमित हों, लेकिन अगर सपने बड़े हों और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।


















