ग्राम सभा दयालपुर में मनरेगा के तहत कराया जा रहा है काम लॉकडाउन के कारण मजदूर बैठे थे घरों पर

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Azamgarh:ग्राम सभा दयालपुर के प्रधान रामभोज चौहान मनरेगा के तहत आज 1 मई मजदूर दिवस के दिन सभी मनरेगा में काम करने हेतु प्रेरित किया और सबको मजदूर दिवस की बधाई दी जिसमें आज के दिन को लेकर के मजदूरों में काफी उमंग उत्साह दिखाई दिया मजदूर हंसी-खुशी से मिलजुल कर कार्य कर रहे हैं आज मजदूरों के लिए बहुत ही खास दिन है देश में लॉक डाउन के चलते मजदूर घर पर ही बैठे थे जिसको ग्राम प्रधान संज्ञान में लेते हुए आज 1 मई मजदूर दिवस के ही दिन काम को चालू कराया Labour Day Or May Day:  एक मई को दुनिया के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाता है। इन दिन को लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है। इस दिन भारत समेत कई देशों में मजदूरों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम किया जाता है। ये दिन मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया के 80 से अधिक देशों में छुट्टी होती है। इस मौके पर मजदूर संगठनों से जुड़े लोग रैली व सभाओं का आयोजन करते हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज भी बुलंद करते हैं। यहां जानें मजदूर दिवस या मई दिवस से जुड़ी 5 खास बातें – 
1. कैसे और क्यों हुई शुरुआत
अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत एक मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। इस आंदोलन के दौरान अमेरिका में मजदूर काम करने के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किए जाने को लेकर आंदोलन पर चले गए थे। 1 मई, 1886 के दिन मजदूर लोग रोजाना 15-15 घंटे काम कराए जाने और शोषण के खिलाफ पूरे अमेरिका में सड़कों पर उतर आए थे। इस दौरान कुछ मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी थी जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें यह ऐलान किया गया कि 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। इसी के साथ भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में काम के लिए 8 घंटे निर्धारित करने की नींव पड़ी।

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