शौचालय का निरिक्षण करने आए से डीसी ने शौचलयों की दशा पर नाराजगी जाहिर की

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गांवों में शौचालयों की दशा एकदम से खराब है लेकिन कागजी औपचारिकतायें इस तरह से पूरी होती हैं कि लगता है पूरा गांव वाटिका की तरह सजा दिया गया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है|
ईशापुर ग्रामसभा में दुर्गा मन्दिर के पास अनुसूचित बस्ती में भी वही हाल है|
जब से शौचालय का पैसा सीधे पात्रों के खाते में दिया जाने लगा तब से कुछ सुधार तो आ ही गया|

ईशापुर ग्रामसभा में कुछ ऐसे शौचालय हैं जो प्रधान की मनमानी से बने हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं निकलता चूंकी पहले शौचालय का पैसा प्रधान के खाते में आता था जिसे प्रधान को पात्रों के खाते में ट्रांसफर करना होता था यहीं से सबसे बड़ा घोटाला होता था| प्रधान के द्वारा चतुर्थ श्रेणी के ईंटों को गांव में पटक दिया जाता था और कहा जाता था सभी लोग अपने शौचालय का गढ़्ढ़ा तैयार कर गिनती कर ईंट ले जायें|
ईशापुर ग्रामसभा में भी ऐसा ही घोटाला सामने आया है जितने भी शौचालयों का निर्माण प्रधान के द्वारा कराया गया है उनकी स्थिती दयनीय है |
आजमगढ़ के विकाशखण्ड फूलपुर के अन्तर्गत ईशापुर गांव में डीपीआरओ के आदेश पर आजमगढ़ से डीसी शौचालय निरिक्षण करने आये थे, शौचालयों की स्थिती पर नाराजगी जाहिर किये |
पत्रकारों के सवालों के जवाब में डीसी ने कहा की सम्बन्धित प्रधान,सचिव के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी|

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