जौनपुर/पुलिस ने संपादक पर किया गुंडा एक्ट की कार्रवाही

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जौनपुर। गरीब, बेबस, लाचार की आवाज बनना तथा अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर छापना पुलिस प्रशासन की निगाह में बहुत बड़ा जुर्म और अपराध साबित हो रहा है। जिसका खामियाजा लगातार पत्रकारों को अपनी जान गवाकर तो कहीं फर्जी मुकदमों के साथ-साथ पुलिसिया उत्पीड़न और तांडव तथा बर्बरता की हदों का सामना करके चुकाना पड़ रहा है। पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने प्रथम पत्रकार वार्ता में पत्रकारों को विश्वास दिलाया था कि अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे तथा बैंकों में सीसीटीवी कैमरे सुचारू रूप से कार्य करते नजर आएंगे वही इसके विपरीत प्रेस कार्यालय का सीसीटीवी कैमरा नोचवाकर पत्रकार को ही अपराधी बनाने की जुगत जुगाड़ करते नजर आ रहे हैं। जिनके कार्यकाल में गरीब, बेबस ,लाचार ही नहीं पत्रकार भी पुलिस उत्पीड़न और षडयंत्र का शिकार बनाए जा रहे हैं। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार छप रही खबरों से अजिज शहर कोतवाली पुलिस ने कई बार जेल जा

चुके चाचकपुर वार्ड की सभासद प्रभावती देवी पत्नी पन्ना लाल यादव के पुत्र लाल बहादुर उर्फ नेपाली की तहरीर पर 15 जुलाई 2018 को संपादक अरुण कुमार यादव के खिलाफ फर्जी और मनमर्जी मुकदमा 380/2018 धारा अंतर्गत 147,148,504,506,452 दर्ज कराया जिसमें नगर पालिका कर्मियों के द्वारा सफाई का विरोध बताकर घर में घुसकर पिस्टल लहराने और गाली गलौज का आरोप लगाया दूसरा मुकदमा सदाफल उर्फ ननकू पहलवान की दूसरी तथाकथित पत्नी कमला देवी ने मुकदमा संख्या 316 /2019 धारा अंतर्गत 147,148,354,504,506 दर्ज कराया जिसमें पैतृक मकान में कब्जे को लेकर संपादक तथा उनके पिता और दो पुत्रों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया तथा तीसरा मुकदमा सभासद पुत्र ने दोबारा मुकदमा संख्या 59/ 2021 धारा अंतर्गत 354,452,323,504,506 दर्ज कराया जिसमें घर में घुसकर उसके पिता को लात मुक्का से मारकर घायल करना तथा बीच-बचाव करने आयी अपनी

माँ सभासद प्रभावती देवी,पत्नी तथा चार अन्य बहुओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया।इतना ही नहीं सभासद पुत्र लाल बहादुर उर्फ नेपाली ने खंडयंत्र के तहत मुख्य रूप से घायल अपने पिता एवं सभासद पति पन्ना लाल यादव को छोड़कर शेष 6 महिलाओं का फर्जी मेडिकल भी बनवा लिया जिसकी शिकायत पत्रकार ने जिलाधिकारी महोदय से किया तत्पश्चात तीन डॉक्टरों का पैनल गठित हुआ जिसमें नियत तिथि बीत जाने के बाद भी शहर कोतवाल उपरोक्त फर्जी मेडिकल धारियों का दोबारा मेडिकल नहीं करवा सका क्योंकि मामला फर्जी और मनमर्जी था। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार जनमानस की आवाज बन रहे संपादक पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने अपराधी प्रवृति के सभासद पुत्र लाल बहादुर उर्फ नेपाली को मोहरा बनाया तथा संपादक अरुण कुमार के पिता श्री

पारसनाथ यादव के द्वारा वर्ष 1992 में कोतवाली थाना अंतर्गत मोहल्ला ख्वाजादोस्त स्थित बैनामा ली गई दुकान और भूखंड पर अवैध कब्जा जमाये सदाफल उर्फ ननहकू पहलवान तथा पन्ना लाल यादव का पुत्र करोड़ों की संपत्ति को मुफ्त में हासिल करने के लिए पुलिस का मददगार बनता रहा। बेबस लाचार का मनमाने तौर पर शिकार करने वाली कोतवाली पुलिस ने लगातार भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकार पर आईजी और बाहुबली की यारी को मुख्य मुद्दा बनाकर 4 जुलाई 2021 को शाम 5:30 बजे पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अपराध की पराकाष्ठा को लांघते हुए न सिर्फ बर्बरता की हदों को पार किया बल्कि पत्रकार और उसके परिवार का उत्पीड़न करते हुए घर और ऑफिस में बेखौफ होकर लूटपाट किया।
इसी कड़ी में आज दिनांक 25 जुलाई 2021 दिन रविवार को

12:30 बजे दिन में शहर कोतवाली पुलिस के द्वारा एक नोटिस अंतर्गत धारा 3 (1) उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 की रिसीव कराई गई। जिसमें प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली संजीव कुमार मिश्रा की रिपोर्ट पर पुलिस अधीक्षक जौनपुर की आख्या के अनुसार प्रीत टाइम्स के संपादक अरुण कुमार यादव पुत्र श्री पारसनाथ यादव निवासी मोहल्ला सिपाह जिला जौनपुर को एक खतरनाक एवं दुसाहसिक व्यक्ति बताया तथा यह व्यक्ति भारतीय दंड विधि के अध्याय 16 व 22 में उल्लेखित दंडनीय अपराध करता और करने का प्रयास करता है और ऐसा करने के लिए दुश प्रेरित करता है यह व्यक्ति क्षेत्र एवं जनमानस में एक खतरनाक व्यक्ति है। इतना ही नहीं थाना कोतवाली जौनपुर में उसकी अपराधिक गतिविधियों और कार्यों से थाना क्षेत्र के व्यक्तियों के जानमाल व संपत्ति के संत्रास संकट अपहानि हो रही है क्योंकि वह इस जनपद के उपरोक्त भूभाग में चोरी करने तथा मारने पीटने आदि जैसे जघन्य

अपराध करता और जनसाधारण को डराकर आतंकित किया करता है। कलमकार के द्वारा किए गए अपराधों और उसके विरुद्ध साक्षी गण अपने प्राण व संपत्ति के भय से आतंकित होकर उसके विरुद्ध साक्ष्य देने को तैयार नहीं हैं। लाइन बाजार थाना क्षेत्र में हुई करोड़ों की डकैती में मददगार रहे संजीव कुमार मिश्रा की रिपोर्ट और पुलिस अधीक्षक की आख्या की व्याख्या जोर शोर से चर्चा का विषय बनती नजर आती है जिनके कार्यकाल में गरीब बेबस लाचार को एक तरफ जहां फर्जी औरमनमर्जी मुकदमों का शिकार बनाया जा रहा है ठीक उसी प्रकार अपराध और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकार के खिलाफ दूषित मानसिकता से ग्रसित होकर शहर कोतवाल के द्वारा उच्च अधिकारियों के सहयोग से की जा रही कार्यवाही अविधिक रुप से दूषित मानसिकता को दर्शाती है जो पुलिस महकमे को शर्मसार करती नजर आती है और चिंता के साथ-साथ जांच का भी विषय हैं।

रिपोर्ट के मास न्यूज

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