सुल्तानपुर
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में आवारा पशुओं के संरक्षण और गौवंश की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। मामला सुल्तानपुर जनपद के नगर पंचायत दोस्तपुर का है, जहाँ निर्माणाधीन गौशाला प्रशासन की सुस्ती और कार्यदायी संस्था की लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण बनी हुई है। समय सीमा बीती, पर काम अधूरा सरकार की मंशा थी कि हर नगर पंचायत में एक वर्ष के भीतर गौशाला का निर्माण पूर्ण कर लिया जाए ताकि सड़कों पर घूम रहे गौवंश को सुरक्षित ठिकाना मिल सके। दोस्तपुर में भी करोड़ों की लागत से गौशाला का काम शुरू हुआ, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी यह अभी तक ‘निर्माणाधीन’ ही है। तस्वीरें सच बयां कर रही हैं। रात के अंधेरे में गौवंश सड़कों पर घूमने और कूड़े के ढेरों के पास बैठने को मजबूर हैं। जिस गौशाला के दरवाजे उनके लिए खुल जाने चाहिए थे, वे आज भी निर्माण की सुस्त रफ्तार के कारण बंद हैं। इससे न केवल पशुओं की जान को खतरा है, बल्कि रात के समय राहगीरों के लिए भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

















