जौनपुर,गौराबादशाहपुर।आज मैं उनसे पूछना चाहता हूं जो गरीबों के हित की बात करते हैं, क्या वास्तव में गरीबों के नाम पर चलाई जा रही योजनाएं गरीबों को मिल रही हैं “अगर नहीं” तो वास्तव में इसका जिम्मेदार कौन है,अगर बीपीएल कार्ड,जनधन खाता या आयुष्मान कार्ड वास्तव में गरीबों का बनाया गया है तो पहले उसकी जांच होनी चाहिए,क्या सचमुच में पात्र व्यक्तियों का बनाया गया है,अगर पात्र व्यक्तियों का बनाया गया है, तो ही वह योजना के हकदार हैं, अन्यथा की स्थिति में इसको आधार मानना गरीबों के साथ सरासर अन्याय है, समय परिवर्तनशील होता है,पहले जब कभी किसी गरीब आदमी को बीपीएल की श्रेणी में रखा गया था तो वह शायद गरीब रहा होगा,लेकिन आज वह अमीर हो गया है फिर भी उसे बीपीएल कार्ड देकर उसे गरीबी की श्रेणी में रखा जा रहा है यह कहां तक सही है,या फिर जिन लोगों ने पात्रों का चयन न करके अपात्रों का कार्ड बनाया, उन्हें भी दंड का भागीदार होना चाहिए, क्योंकि चंद रुपयों की खातिर उन लोगों ने गरीबों के साथ घोर अन्याय किया है,जो वास्तव में पात्र व्यक्ति है वह आज भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है,बहुत से लोग तो ऐसे हैं जिनके पास सामर्थ ही नहीं है कि अपनी बात को मजबूती के साथ किसी अधिकारी के सामने रख सकें, ऐसी स्थिति में उन्हें सुविधाओं से दरकिनार कर दिया जाता है,मैं शासन से अनुरोध करना चाहता हूं कि ऐसी स्थिति में शासन द्वारा स्वयं संज्ञान लेकर पुनःनिष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो पात्र हैं उनको चिन्हित कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देना जनहित में होगा और जो अपात्र हैं किसी भी हाल में अगर उनको पात्रता की श्रेणी में रखा गया है तो उन्हें तत्काल प्रभाव से वंचित किया जाना अति आवश्यक है
बीपीएल कार्ड,जनधन खाता एवं आयुष्मान कार्ड को गरीबी का आधार मानना,गरीबों के साथ अन्याय है-डॉ.जयसिंह राजपूत
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