राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुम्ब न्यायालय ने रचा कीर्तिमान, 69 पारिवारिक वादों का हुआ निस्तारण

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गाजीपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर शनिवार को कुटुम्ब न्यायालय गाजीपुर में पारिवारिक विवादों के निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई। प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय गाजीपुर के पीठासीन अधिकारी शैलोज चंद्रा की अध्यक्षता में आयोजित लोक अदालत में कुल 69 पारिवारिक वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया।
लोक अदालत में निस्तारित मामलों में भरण-पोषण से संबंधित वादों की संख्या सर्वाधिक रही। कुल 35 भरण-पोषण वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में पीड़ित महिलाओं को उनके बकाया भरण-पोषण की सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान मौके पर ही कराया गया। इससे लंबे समय से अपने हक की राशि की प्रतीक्षा कर रही महिलाओं को बड़ी राहत मिली।
लोक अदालत की सबसे सुखद तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब 10 बिछड़े हुए दंपतियों ने अपने पारिवारिक विवादों को समाप्त कर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। सभी दंपति न्यायालय में स्वयं उपस्थित हुए और आपसी सहमति से विवाद समाप्त करते हुए एक-दूसरे को माला पहनाई। इसके बाद दंपतियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। इस दौरान न्यायालय परिसर में भावुकता और खुशी का माहौल देखने को मिला।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय शैलोज चंद्रा ने बताया कि पिछले दो माह के दौरान सुलह-समझौते के उद्देश्य से लगभग 200 से अधिक पारिवारिक मामलों को मीडिएशन सेंटर भेजा गया था, लेकिन इनमें से केवल पांच मामले ही मीडिएशन के माध्यम से सफलतापूर्वक समझौते तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि यदि मीडिएशन के माध्यम से समझौते वाले मामलों की संख्या अधिक होती, तो राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक वादों के निस्तारण का आंकड़ा और भी बढ़ सकता था। उन्होंने आमजन से अपील की कि पारिवारिक विवादों को लंबे समय तक न्यायालय में चलाने के बजाय आपसी बातचीत, सुलह और समझौते के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत पारिवारिक विवादों के शांतिपूर्ण एवं शीघ्र समाधान का प्रभावी माध्यम है।

जयप्रकाश चंद्रा, ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर

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