आजमगढ़। जिला महिला चिकित्सालय में प्रसूताओं और उनके तीमारदारों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल के वार्ड से लेकर वार्ड के बाहर तक इन दिनों मोटे-मोटे चूहे बेखौफ घूमते नजर आ रहे हैं। चूहों की संख्या इतनी अधिक है कि मरीजों और तीमारदारों के बीच उनके आतंक का माहौल बना हुआ है। मौका मिलते ही चूहे मरीजों और उनके साथ आए परिजनों के खाने-पीने के सामान को भी उठा ले जाते हैं।
महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं के साथ उनके परिजन भी कई-कई घंटे और कभी-कभी रातभर अस्पताल में रहते हैं। ऐसे में वे अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर आते हैं। तीमारदारों का कहना है कि सामान सुरक्षित रखना भी चुनौती बन गया है। आसपास चूहों की आवाजाही देखते ही लोग अपने सामान को बचाने में जुट जाते हैं।
अस्पताल में घूमने वाले चूहे सामान्य आकार से काफी बड़े बताए जा रहे हैं। उनकी संख्या अधिक होने के कारण मरीज और तीमारदार उन्हें भगाने से भी कतराते हैं। लोगों को डर रहता है कि कहीं चूहा हमला न कर दे या काट न ले। पहले से ही इलाज और प्रसव को लेकर परेशान महिलाओं और उनके परिजनों के लिए चूहों की यह समस्या अतिरिक्त परेशानी का कारण बन गई है।
हालांकि अस्पताल के वार्ड और आसपास सामान्य साफ-सफाई की व्यवस्था दिखाई देती है, लेकिन चूहों की रोकथाम के लिए प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। अस्पताल परिसर में जगह-जगह चूहों के छिपने और निकलने के रास्ते होने के कारण वे लगातार वार्ड और आसपास के क्षेत्रों में घूमते रहते हैं।
अस्पताल में तैनात स्वास्थ्यकर्मी भी चूहों की समस्या से परेशान नजर आते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि चूहे कब और किस तरफ से आ जाते हैं, इसका पता नहीं चलता। अस्पताल परिसर में उनके छिपने के लिए कई जगहें हैं, जिसके कारण उन्हें भगाने का भी कोई खास फायदा नहीं होता। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक चूहों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित रूप से अभियान चलाए जाने की जरूरत है।
मरीजों और तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन से चूहों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी पेस्ट कंट्रोल कराने, चूहों के आने-जाने के रास्तों को बंद कराने और अस्पताल परिसर में उनकी संख्या पर नियंत्रण के लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि महिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर चूहों की लगातार मौजूदगी न केवल परेशानी का कारण है, बल्कि स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से भी इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सब ब्यूरो चीफ़ महादेव यादव की रिपोर्ट





















