आफत बने छुट्टा जानवर, हाकिम बने बेपरवाह

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अंबेडकरनगर

जिले में आवारा पशु लोगों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। राह चलते कब, कहां और कौन इनके कारण चोट खा जाए, नहीं कहा जा सकता। बुजुर्गों, बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा आवारा पशु बन चुके हैं। किसान के लिए किसानों की गाढ़ी कमाई को छुट्टा जानवर चट कर रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलों को मवेशियों के झुंड पहुंचकर नष्ट कर देते हैं।

खेती-किसानी के लिए समस्या बने छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाने के बजाय जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। सड़क हादसों और रोड जाम की वजह भी छुट्टा जानवर बन रहे हैं। जनपद मुख्यालय अकबरपुर बाजार में बीच सड़क पर बैठे छुट्टा जानवर इसकी पुष्टि कर रहे हैं। गाय, सांड़ ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, लेकिन जिम्मेदार इस समस्या से मुंह मोड़ लिए हैं। लगभग हर जगह छुट्टा जानवरों को लेकर रोना मचा है। जनपद मुख्यालय पर तो आवारा पशुओं की संख्या तकरीबन 300 के ऊपर ही होगी। अब तक इनके हमले और लड़ाई में दर्जनों लोग घायल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद इन पर अंकुश लगाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं। नगरपालिका परिषद छुट्टा जानवरों को पकड़ने के लिए तो हाथ खड़े कर लिए हैं। नपाप का रोना है कि उनके पास गौशाला भी उपलब्ध है। शहजादपुर बाजार में मार्ग पर छुट्टा मवेशियों के चलते पूरा मार्ग रात में बाधित हो जाता है। आलम यह है की दिन ढलते ही मवेशियों के झुंड के झुंड सड़क पर आकर बैठ जाते हैं। तेजी से फर्राटा भरते हल्के व भारी वाहन कभी भी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। साड़ के आतंक से पुलिस चौकी शहजादपुर के आरक्षी भी भयभीत रहते हैं। प्रतिदिन चौकी का दरवाजा तोड़ अंदर रखते हुए सामानों को करता है नुकसान कई बार शिकायत करने के पश्चात भी नगर पालिका परिषद अकबरपुर द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।