ग़मगीन माहौल में मनाया गया सकरा दक्षिण में मुहर्रम

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सकरा दक्षिण/अम्बेडकर नगर :इस्लामिक कैलेण्डर के मुताबिक नये साल की शुरुआत मुहर्रम महीनें से होती है।मुहर्रम कोई त्योहार या ख़ुशी का महीना नही है।बल्कि ये महीना बेहद गम से भरा है।
आज से लगभग 1400 साल पहले मुहर्रम का महीना इस्लामिक तारीख़ की एक ऐतिहासिक एवं रोंगटे खड़े कर देने वाली जंग हुई थी।इस जंग की दास्तां को सुनकर, पढ़कर रूह कांप जाती है। बातिल के खिलाफ इंसाफ़ की जंग लड़ी गई थी।जिसमे अहल-ए-बैत (नबी के खानदान) ने अपनी जान को कुर्बान कर इस्लाम को बचाया था।इस जंग में जुल्म की इंतेहा हो गई ।जब इराक की राजधानी बग़दाद से 120 किलोमीटर दूर कर्बला में बादशाह यजीद के पत्थर दिल फरमानों ने महज 6 महीने के अली असगर को पानी तक पीने नही दिया।इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक इराक में यजीद नाम का ज़ालिम इंसानियत का दुश्मन था। यजीद खुद को खलीफा मानता था।लेकिन अल्लाह पर उसका कोई विश्वास नही था।वह चाहता था हज़रत इमाम हुसैन उसके खेमें में शामिल हो जायें।लेकिन हुसैन को यह मंजूर नही था। आप ने यजीद के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। पैग़म्बर ए इस्लाम हज़रत मोहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार व दोस्तों के साथ शहीद कर दिया गया था।इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार व साथियों के साथ मुहर्रम की 2 तारीख को कर्बला पहुँचे थे ।उनके काफिले में छोटे छोटे बच्चे और बूढ़े लोग भी थे।यजीद ने हुसैन को मजबूर करने के लिये 7 तारीख़ को पानी बन्द कर दिया था। 9 मुहर्रम की रात हुसैन ने रोशनी बुझा दी और कहने लगे-यजीद की सेना बडी है उसके पास एक से बढ़कर एक बड़े हथियार है,ऐसे में बचना मुश्किल है।मैं यहाँ से चले जाने का हुक़्म देता हूँ। मुझे कोई ऐतराज नहीं है।जब कुछ देर बाद फिर रोशनी जलाई तो सब के सब दोस्त वही बैठे थे। कोई हुसैन को छोड़कर नही गया।10 मुहर्रम की रात हुसैन ने नमाज़ पढ़ाई ।तभी यजीद की सेना ने तीरों की बारिश कर दी।सभी साथी हुसैन को घेरकर खड़े हो गए और हुसैन नमाज़ पूरी करते रहे।इसके बाद दिन ढलने तक हुसैन के 72 साथी शहीद हो गए।जिनमे उनका 6 महीने का बेटा अली असग़र और 18 साल का बेटा अली अकबर भी शामिल था।प्यास की वजह से उनका 6 महीने का बेटा अली असग़र बेहोश हो गया।वह अपने बेटे को लेकर दरिया के पास गए,उन्होंने बादशाह की सेना से बच्चे के लिये पानी मांगा। जिसे अनसुना कर दिया गया।यजीद ने हुर्मल नाम के शख्स को हुसैन के बेटे को कत्ल करने का फरमान सुना दिया।देखते ही देखते 3 नोक वाले तीर से 6 महीने के बच्चे की गर्दन को लहू लुहान कर दिया। इसके बस शिम्र नाम के व्यक्ति से हुसैन की भी गर्दन कटवा दी। कहते हैं जब गर्दन कटी टी उस समय हुसैन की गर्दन सज़दे में थी।
इस गमजदा माहौल में मुख्य रूप से मोहम्मद इलियास नेता सपा, जान मोहम्मद नेता सपा, एडवोकेट मोहम्मद सिकन्दर, पत्रकार इसरार अहमद, अली हसन , कौशर अली, इज़हार अहमद, यासीन मोहम्मद, जैतपुर थाने के पुलिस कर्मी आदि लोग मौजूद रहे।

पत्रकार इसरार अहमद की रिपोर्ट