सुल्तानपुर
सुल्तानपुर जनपद के क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है, जो हमारे स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी हकीकत को बेनकाब करती है।
क्या है पूरा मामला?
सरावा निवासी संदीप शर्मा की पत्नी, श्वेता शर्मा उम्र लगभग 26 वर्ष सुबह अपने घर का रोजमर्रा का काम कर रही थीं। इसी दौरान एक विषैले सांप ने उन्हें डस लिया। जैसे ही परिजनों को इस बात की भनक लगी, वे बिना एक पल गंवाए उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अखंड नगर लेकर पहुंचे।
CHC में प्राथमिक उपचार के बाद श्वेता की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अंबेडकर नगर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। लेकिन इसके बाद शुरू हुआ उस व्यवस्था का इम्तिहान, जो कागजों पर तो चुस्त-दुरुस्त दिखती है, पर धरातल पर दम तोड़ती नजर आती है।
घंटों का इंतजार और लाचारी
अस्पताल से रेफर होने के बाद परिजन एम्बुलेंस के लिए लगातार गुहार लगाते रहे। समय बीतता गया, जहर शरीर में फैलता गया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एम्बुलेंस नसीब नहीं हुई। अस्पताल परिसर में तड़पती मरीज की हालत देख परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर से भरोसा उठता देख, आखिरकार हार मानकर परिजनों ने निजी (प्राइवेट) वाहन का इंतजाम किया और किसी तरह मरीज को अस्पताल लेकर भागे।
क्या यह पहली बार है?
यह कोई इकलौता वाकया नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस सेवाओं की यह लचर व्यवस्था अब आम बात बन चुकी है। ‘एंबुलेंस न मिलने’ या समय पर न पहुंचने की शिकायतें आए दिन सामने आती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा धीरे-धीरे पूरी तरह से फेल होती जा रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
निष्कर्ष:
एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और त्वरित बनाने के लाख दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ अखंड नगर की यह घटना सिस्टम की संवेदनहीनता और नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। यदि समय रहते इन आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो व्यवस्था की यह लापरवाही न जाने कितने और बेकसूरों की जान ले लेगी।













