किसान आंदोलनकारियों ने 4 घंटे के लिए किया रेलवे ट्रैक जाम

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नई दिल्ली :नए कृषि कानूनों (Farms Laws 2020) के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) लगातार जारी है. सरकार और किसान नेताओं की कई दौर की बैठक के बाद भी इसका समाधान नहीं निकल सका है. किसान इन कानूनों को निरस्त करवाने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं सरकार इसमें संशोधन से अधिक कुछ नहीं करना चाह रही है. इस बीच किसानों ने ‘चक्का जाम’ के बाद गुरुवार यानि 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक देशव्‍यापी ‘रेल रोको’ आंदोलन का ऐलान किया है. बता दें कि किसानों ने छह फरवरी को ‘चक्का जाम’ किया था. ‘चक्का जाम’ में हालांकि दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड को इससे दूर रखा गया था,
पटरी पर बैठेंगे हजारों किसान
किसान संगठनों के मुताबिक, गुरुवार को देशभर में हजारों किसान रेल की पटरियों पर बैठेंगे. किसानों की योजना पूरे देश के रेल नेटवर्क को चार घंटों के लिए ठप करने की है. जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अभीक साहा ने IANS से बातचीत में कहा, ‘जिस समय ट्रैफिक सबसे कम होती है, उस समय हमने सड़क जाम किया और इसी प्रकार, दिन में ट्रेन की ट्रैफिक कम होती है, क्योंकि लंबी दूरी की ट्रेन ज्‍यादातर रात में चलती हैं.’ उन्‍होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरा आंदोलन योजना के मुताबिक हो. ‘रेल रोको’ आंदोलन का मकसद सरकार पर किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव बनाना है. उन्होंने कहा, ‘हम खुफिया जानकारी इकट्ठा करेंगे. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों और कुछ अन्य क्षेत्रों पर हमारा ध्यान केंद्रित रहेगा. हमने इन क्षेत्रों में रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) की 20 कंपनियों को तैनात किया है.’ कुमार ने कहा, ‘हम उन्हें इस बात पर राजी करना चाहते हैं कि यात्रियों को कोई असुविधा नहीं हो और हम चाहते हैं कि यह (रेल रोको) अभियान शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाये.’ एसकेएम ने कहा था कि देशभर में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेलों की आवाजाही को अवरुद्ध किया जाएगा.
एक अधिकारी ने कहा, ‘रेल रोको अभियान के मद्देनजर रेलगाड़ियों की आवाजाही पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. एक बार जब हमें विरोध की स्थिति की तस्वीर मिल जाती है तो संवेदनशील स्थानों की पहचान हो जाती है, तो हम कार्रवाई की योजना बनाएंगे. हमारे पास लगभग 80 रेलगाड़ियां हैं जो संभावित संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरती हैं और उनमें से ज्यादातर दोपहर 12 बजे से पहले ही गुजर जाती है.’