गोहिला तालाब प्रकरण ने पकड़ा राजनीतिक तूल, पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने उठाए राजस्व अभिलेखों पर सवाल निष्पक्ष जांच की मांग

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हंसवर/अम्बेडकरनगर

टांडा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोहिला में तालाब की सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में राजस्व एवं पुलिस प्रशासन ने तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के बाद जहां प्रशासन इसे न्यायालय के आदेशों का पालन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की आपत्तियों के बीच अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री एवं टांडा के पूर्व विधायक राममूर्ति वर्मा का बयान सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और न्यायालय के आदेशों का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है। लेकिन किसी भी कार्रवाई में कानून के साथ-साथ पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि कार्रवाई गलत अथवा त्रुटिपूर्ण राजस्व अभिलेखों के आधार पर की गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि गोहिला प्रकरण में जिन अभिलेखों और कागजातों के आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई की है, उन्हें लेकर ग्रामीणों द्वारा गंभीर आपत्तियां उठाई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन का दायित्व बनता है कि वह सभी अभिलेखों का दोबारा सत्यापन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
राममूर्ति वर्मा ने कहा कि “कानून सबके लिए समान है और न्यायालय के आदेशों का पालन होना चाहिए, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की भूमि या संपत्ति पर गलत अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण का पुनः स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, राजस्व अभिलेखों की गहन जांच की जाए तथा सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। उनका कहना था कि न्याय तभी माना जाएगा जब पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हो।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों को हल्के में लेने के बजाय गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की राजस्व अभिलेख संबंधी त्रुटि सामने आती है तो उसे तत्काल दुरुस्त किया जाए और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या गलती पाई जाती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता का प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि गोहिला गांव में तालाब की सरकारी भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण की शिकायतें की जा रही थीं। मामला न्यायालय तक पहुंचने के बाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान कई निर्माण हटाए गए, जिसके बाद प्रभावित पक्षों द्वारा कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने लगे।
अब पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। क्षेत्र में इसे लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश तथा उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर विधिसम्मत ढंग से की गई है। यदि किसी व्यक्ति को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह सक्षम न्यायालय अथवा संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रख सकता है।
फिलहाल गोहिला तालाब अतिक्रमण प्रकरण जिले में चर्चा का
प्रमुख विषय बना हुआ है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे इस मामले में क्या कदम उठाता है तथा जांच की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।

राम शकल संवाददाता की रिपोर्ट

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