गाजीपुर। परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर गुरुवार को उनका पैतृक गांव धामूपुर देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आया। वीर सपूत की शहादत की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बड़ी संख्या में लोग जुटे। कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस दौरान पूरा परिसर भारत माता के जयकारों और वीर सपूत के सम्मान में गूंज उठा।
श्रद्धांजलि समारोह में वीर अब्दुल हमीद के अदम्य साहस, अद्वितीय युद्ध कौशल और देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का जीवन भारतीय सैनिक के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।
केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कहा कि, वीर अब्दुल हमीद का नाम भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने जिस अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया, वह भारतीय सैन्य इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। उन्होंने दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त कर युद्धभूमि में अपनी वीरता का परिचय दिया और देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा देश के युवाओं को राष्ट्रहित में समर्पण और कर्तव्य के प्रति निष्ठा का संदेश देती है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि, भारतीय सेना ने हर चुनौती का सामना साहस और पराक्रम के साथ किया है। वर्ष 1965 और 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक भारतीय जवानों ने अपनी वीरता से देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भी भारतीय सेना ने अपनी क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। स्वदेशी हथियारों और आधुनिक रक्षा तकनीक की क्षमता ने दुनिया के सामने भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति को प्रदर्शित किया है। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में निर्यातक देश के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
वीर अब्दुल हमीद ने 10 सितंबर 1965 को भारत-पाक युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। युद्धभूमि में अदम्य साहस और असाधारण पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले वीर अब्दुल हमीद को उनके शौर्य के लिए मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका नाम आज भी भारतीय सेना के वीरता के इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।धामूपुर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में वीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के साथ ही उनके बलिदान को नमन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर देश के अमर वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। समारोह के दौरान वातावरण में देशभक्ति का जज्बा दिखाई दिया और भारत माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा।। वक्ताओं ने कहा कि, वीर अब्दुल हमीद ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना देश की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। उनकी शहादत भारतीयों के लिए गौरव का विषय है और धामूपुर की धरती देश की सैन्य परंपरा में वीरता और बलिदान की प्रेरक पहचान बन चुकी है।
श्रद्धांजलि समारोह में वीर अब्दुल हमीद के परिजनों और उनके गांव से जुड़े लोगों ने भी उनके योगदान को याद किया। लोगों ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले इस महान सपूत की स्मृति को संजोना और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। शहादत दिवस पर धामूपुर में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि वीर अब्दुल हमीद का शौर्य और बलिदान आज भी लोगों के दिलों में उसी सम्मान और गर्व के साथ जीवित है।
जयप्रकाश चंद्रा, ब्यूरो चीफ गाज़ीपुर 














