अयोध्या, 03 जुलाई 2026। अयोध्या स्थित श्री रविदास मंदिर के पूज्य महंत बनवारीपति ब्रह्मचारी जी का दिनांक 02 जुलाई 2026 को ब्रह्मलीन हो जाना संत समाज एवं समस्त श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत दुःखद एवं अपूरणीय क्षति है। दिनांक 03 जुलाई 2026 को आरती, पूजन, अंतिम दर्शन एवं संत विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी (SDM), पुलिस प्रशासन, संत समाज, चेला-सेवकों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, श्री रविदास मंदिर की भूमि को लेकर लंबे समय से न्यायालय में वाद लंबित था, जिसमें निर्णय महंत जी के पक्ष में आया। इसके बाद भूमि की नाप-जोख को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। समर्थकों का आरोप है कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास किए गए तथा महंत जी को मानसिक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। इसी तनाव के बीच उनका रक्तचाप (BP) अत्यधिक बढ़ गया, जिससे उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। समर्थकों के अनुसार, शासन स्तर पर हस्तक्षेप के बाद कथित रूप से हो रही त्रुटिपूर्ण नाप-जोख की प्रक्रिया रोकी गई। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वे मंदिर लौटे, किंतु लगभग एक सप्ताह के भीतर उन्होंने देह त्याग दिया।
महंत जी का अंतिम संस्कार मंदिर परिसर की उसी पावन भूमि पर किया गया, जहाँ उनके *पूज्य गुरु घनश्याम दास शास्त्री जी* सहित अन्य संतों की समाधियाँ स्थित हैं। यह स्थल संत परंपरा का महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।
संत समाज एवं श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से श्री रविदास मंदिर परिसर की सुरक्षा, विवादित भूमि की निष्पक्ष एवं विधिसम्मत रक्षा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
साथ ही देश-विदेश में रहने वाले संत शिरोमणि रविदास जी के सभी अनुयायियों से भावपूर्ण अपील की गई है कि वे तन, मन और धन से सहयोग कर अयोध्या स्थित इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण, विकास और सम्मान की रक्षा हेतु एकजुट हों। यही पूज्य महंत बनवारीपति ब्रह्मचारी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।




















