डायल 112 के सामने कथित बयान से बढ़ा विवाद, पुलिस, लेखपाल, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर पीड़िता ने उठाए गंभीर सवाल
सुलतानपुर/दोस्तपुर
दोस्तपुर थाना अंतर्गत ग्राम भदिला में भूमि विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़िता श्रीमती बदामा देवी पत्नी रामनायक लोहार ने पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय में गाटा संख्या 187 के नक्शा दुरुस्ती का वाद विचाराधीन है तथा न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) भी पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद 24 जून 2026 को उनकी अनुपस्थिति में कथित रूप से उनकी भूमि पर आरसीसी पिलर खड़े कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया।
पीड़िता के प्रार्थना-पत्र के अनुसार हरिशंकर पुत्र स्वर्गीय लाल साहब गोसाई, रविन्द्र, सुभाष पुत्रगण स्वर्गीय रामफेर गोसाई तथा पवन कुमार पुत्र रविन्द्र गोसाई सहित अन्य लोगों ने कथित रूप से निर्माण कार्य कराया। महिला का आरोप है कि जब वह अपने पति के साथ मौके पर पहुंचीं और निर्माण का विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज, अभद्रता की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। उनके अनुसार पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रुकवाया, लेकिन पुलिस के वापस लौटते ही निर्माण दोबारा शुरू हो गया। महिला का दावा है कि डायल 112 पुलिस की मौजूदगी में बनाए गए एक वीडियो में हरिशंकर गोसाई कथित रूप से यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि उन्हें दोस्तपुर थाना प्रभारी नारद मुनि सिंह की ओर से निर्माण कराने की अनुमति मिली है। पीड़िता का यह भी आरोप है कि हरिशंकर गोसाई स्वयं को सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय का करीबी बताते हुए निर्माण कार्य जारी रखने की बात कह रहे थे। हालांकि इन कथित बयानों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा विधायक की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
पीड़िता का कहना है कि उन्होंने थाना दोस्तपुर, पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी तथा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उन्हें प्रभावी राहत नहीं मिली। उनका सवाल है कि जब न्यायालय का स्थगन आदेश प्रभावी था तो कथित निर्माण कार्य को समय रहते क्यों नहीं रोका गया।
महिला ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार अनुरोध के बावजूद संबंधित लेखपाल द्वारा समय पर भूमि की पैमाइश नहीं कराई गई, जिससे विवाद और बढ़ता गया। उन्होंने संबंधित लेखपाल एवं अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पीड़िता का कहना है कि एक गरीब परिवार होने के कारण उन्हें लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कहीं से भी प्रभावी राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने पुलिस, प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से न्याय दिलाने की अपील की है।
महिला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित राजस्व अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, न्यायालय के स्थगन आदेश का कड़ाई से पालन, भूमि की पैमाइश, कथित अवैध निर्माण पर तत्काल रोक तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की है।




















