स्वयंवर विवाह पर अड़ी नाराज़ बेटी परिजनों के खिलाफ पहुँची थाने

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जौनपुर/खेतासराय :- एक लड़की की इच्छा होती है कि उसके जीवन मे अच्छा वर मनमुताबिक मिले। जिसके लिए वह ईश्वर से प्रार्थना करती है और सम्भव होता है तमाम तरह की व्रत भी रखकर जीवन में अच्छे वर मिलने की कामना करती है। लेकिन ज्यादातर परिवार के इच्छानुसार लड़कियों का शादी होने का प्रचलन आज भी जारी है। परिवार के इच्छनुसार शादी के बाद मिले वर के साथ लड़की अपना जीवन बिताने के लिए विवश रहती है। भले ही मनमुताबिक क्यों न हो। समाज के लोक – लाज के कारण सन्तोष करके जीवन मिले वर के साथ सामंजस्य बैठाकर जीवन बिताने की कोशिश करती है।

बहुत कम ही देखने को मिलता है जो इससे बगावत करें। लेकिन स्थानीय कस्बा स्थित वार्ड में ऐसा होने से एक लड़की शादी तय होने से पहले ही इंकार कर दी और स्वयंवर विवाह के लिए अड़ गई। यह मामला खुलकर सामने तब आया जब स्वयंवर विवाह के लिए गुहार लगाने थाने पहुँची। जहाँ परिवार बेटी की शादी के लिए वर की तलाश कर ही रहे थे। इसकी भनक लगते ही लड़की शादी से इंकार कर रही है। क्योकि स्वयंवर विवाह करना चाह रही है। जिस पर परिवार तैयार नहीं है। थाने में काफी जद्दोज़द के बाद पुलिस के समझाने – बुझाने के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ।

बताया जाता है कि कस्बा के एक वार्ड निवासी अपनी पुत्री की शादी के वर की तलाश कर रहे थे कि कोई अच्छा वर मिले तो बेटी की शादी कर दी जाएं इसकी भनक कही से बेटी को लग गई। बेटी परिजनों के इच्छानुसार शादी करने से इंकार कर गई। परिजन शादी के लिए बेटी पर दबाव बनाने लगे। जिससे परेशान होकर बेटी रविवार की सुबह न्याय गुहार लगाने थाने पहुँच गई। जिससे परिजनों में हड़कम्प मच गया। लड़की स्वयंवर विवाह करना चाह रही है जबकि परिजन इसके खिलाफ है। परिजन अपने मनमुताबिक बेटी की शादी करना चाह रहे है। लड़की की बात पुलिस सुनकर परिजनों को थाने बुलाई।

थाने में ही काफी समय तक मामला समझाने – बुझाने का चलता रहा। लेकिन लड़की अपनी बात पर अड़ी रही और अपने इच्छानुसार शादी करने की बात कहती रही। अंत में थानाध्यक्ष ने लड़की को नाबालिक बताते हुए मामले को शांत कराया। थानाध्यक्ष ने लड़की को नाबालिक बताते हुए उसे परिजनों के साथ घर वापिस भेज दिया। कोई परिवार ये नही चाहता कि अपनी बेटी की शादी ऐसे जगह की जाएं जहाँ वह हमेशा दुःखी ही रहे। बेटी के लिए हमेशा अच्छा रिश्ते की तलाश करता है। लेकिन एक बेटी का भी अपना मत होता है। समय आने पर वह जीवन के बारे में निर्णय करने के लिए स्वंत्रत है। वह अपने बारे में निर्णय ले सकती है। अपने जीवन का फैसला करते हुए स्वयंवर विवाह के लिए अड़ी रही। जिससे मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।