अखंड नगर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल: अवैध निजी अस्पताल की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत, जिम्मेदार कौन ?

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सुल्तानपुर

मामला सुल्तानपुर जनपद के अखंडनगर थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यशैली और झोलाछाप/अवैध अस्पतालों के खेल ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अखंड नगर से रेफर किए जाने के बावजूद एक प्रसूता को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने और वहां इलाज में हुई भारी लापरवाही के चलते जच्चा और बच्चा दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रशासनिक सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 9 सितंबर को ग्राम अतरौरा अर्शिया (जिला जौनपुर) निवासी पिंकी (पत्नी मोहित कुमार धुरिया, उम्र 22 वर्ष) को प्रसव पीड़ा के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अखंड नगर लाया गया था। परिजनों के मुताबिक, शरीर में खून की कमी (अनीमिया) होने के कारण सीएससी के डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अंबेडकर नगर रेफर कर दिया था।

लेकिन आरोप है कि वहां मौजूद एक आशा बहू के बहकावे और मिलीभगत से परिजनों को एंबुलेंस या अन्य माध्यम से बरगलाकर अखंड नगर स्थित एक निजी अस्पताल ‘श्रेया नर्सिंग होम’ में भर्ती करा दिया गया। आरोप है कि उसी रात श्रेया नर्सिंग होम में पिंकी का ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ। इसके बाद सुबह प्रसूता की हालत जब अत्यधिक नाजुक हो गई, तो निजी अस्पताल के संचालकों ने बिना सुध-बुध के उसे तुरंत वहां से रेफर कर दिया। इलाज के दौरान अंततः प्रसूता पिंकी ने भी दम तोड़ दिया। इस प्रकार एक साथ मां और नवजात दोनों की मौत से पूरे परिवार में कोहराम मच गया है।

परिजनों का छलका दर्द

मृतका के ममेरे भाई रामचरण (पुत्र राम केवल, निवासी प्राणनाथपुर वछेड़िया) तथा मृतका की मां इंदु देवी ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों की इस लापरवाही पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उन्हें सरकारी अस्पताल (अंबेडकर नगर) भेज दिया जाता या निजी अस्पताल द्वारा पैसों के लालच में फर्जी तरीके से भर्ती न किया जाता, तो शायद आज मां और बच्चा दोनों जीवित होते। परिजनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: बिना लाइसेंस कैसे चल रहा अस्पताल?

जब इस पूरे मामले को लेकर सीएचसी अधीक्षक से बात की गई और संबंधित निजी अस्पताल के वैध लाइसेंस व पंजीकरण के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। अधीक्षक का कहना था कि “मेरी जानकारी में उस अस्पताल का कोई लाइसेंस नहीं है।”

अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि यदि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था, तो स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की आंखों के नीचे यह खेल कैसे फल-फूल रहा था? बिना लाइसेंस के संचालित होने वाले ऐसे निजी अस्पताल आखिर किसके संरक्षण और बलबूते पर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं?

जिले में कब थमेगा मौतों का सिलसिला?

सुल्तानपुर जिले में आए दिन अवैध अस्पतालों और नर्सिंग होम की मनमानी के कारण मरीजों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते ठोस प्रशासनिक संज्ञान न लिया जाना विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

क्षेत्र की जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस अवैध ‘श्रेया नर्सिंग होम’ को सील किया जाए, लापरवाह आशा बहू और अस्पताल संचालकों पर हत्या व धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाए, और क्षेत्र में चल रहे अन्य अवैध अस्पतालों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी की इस तरह से कोख न उजड़े।

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