अंबेडकरनगर
शहर से गांव तक झोलाछापों की भरमार है। बगैर डिग्री के छोटी-बड़ी हर बीमारी के इलाज का दावा किया जाता है। स्थिति यह है कि कोई भी ऐसा गांव या चौक-चौराहा नहीं है, जहां चार-छह झोलाछाप न बैठते हों। यहां नीली-पीली गोलियां देकर मरीजों की जेब काटी जा रही है। कई मर्तबा तो उनकी जान से भी खिलवाड़ करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।अकबरपुर तहसील के हर चौक चौराहे पर झोलाछाप डाक्टर बिना रजिस्ट्रेशन के क्लीनिक चला रहे हैं। ये हर बीमारी की उल्टी-सीधी दवा देते हैं। ज्यादातर गरीब तबके के लोग इनके यहां इलाज कराकर अनजाने में अपनी बीमारियां बढ़ा लेते हैं। हालत ज्यादा खराब होने पर महानगरों की दौड़ लगाते हैं। बरियावन, मुरलीनगर चौराहा, हरपुर का (टेढ़वा) तिराहा, सम्मनपुर, सिकंदरपुर, बरौली सैदापुर, पलई रामनगर सहित दर्जनों जगहों पर झोलाछापों का कारोबार बिना रोकटोक चल रहा है। बरियावन बाजार में तो झोलाछापों की भरमार है। पिछले दिनों यहां एक निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान विवाहिता की मौत भी हो गई थी। इसके बाद परिवारजन और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था। प्रशासन ने निजी क्लीनिक को सील कर दिया था, लेकिन अन्य जगहों पर अब भी यह कारोबार बेखौफ चल रहा है। सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी कार्रवाई करने से कतराते नजर आते हैं। स्थानीय निवासी सुधीर यादव, अनिल सिंह, विकास ने कार्यवाही की मांग की है।
गली-कूचों में झोलाछापों की भरमार, कार्रवाई से बचते जिम्मेदार
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