सुल्तानपुर जिले के सुप्रसिद्ध फिजिशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. के. त्रिपाठी के निधन से चिकित्सा जगत में शोक

0
6

सुल्तानपुर जिले के सुप्रसिद्ध फिजिशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. के. त्रिपाठी के निधन से चिकित्सा जगत में शोक

 

सुलतानपुर

 

जनपद सुलतानपुर ने चिकित्सा जगत के एक होनहार, प्रतिभाशाली एवं सुप्रसिद्ध फिजिशियन तथा हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. के. सी त्रिपाठी को असमय खो दिया। उनके निधन से चिकित्सा जगत ही नहीं, बल्कि उन हजारों मरीजों और उनके परिवारों में भी शोक की लहर है, जिन्हें उन्होंने कठिन परिस्थितियों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर नया जीवन देने का काम किया।

डॉ. के सी. त्रिपाठी का चिकित्सा क्षेत्र में योगदान सुलतानपुर के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं था। सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों के बीच उन्होंने जनपद में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को विकसित करने का जो प्रयास किया, वह आने वाले समय में भी याद किया जाएगा। आस्था हॉस्पिटल को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित कर उन्होंने जनपदवासियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।

बताया जाता है कि अयोध्या मंडल में आयुष्मान योजना के अंतर्गत एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा शुरू करने वाले शुरुआती संस्थानों में आस्था हॉस्पिटल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हृदय रोग से पीड़ित अनेक मरीजों को ऐसी सुविधाएं सुलतानपुर में ही उपलब्ध होने लगीं, जिसके लिए पहले उन्हें लखनऊ जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। कई गंभीर मरीज समय पर बड़े शहरों तक नहीं पहुंच पाते थे, ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध यह सुविधा उनके लिए जीवनरक्षक साबित हुई।

20 वर्ष पहले सुलतानपुर में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि और उनके साहस का परिणाम रहा

डॉ. के. त्रिपाठी की दूरदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 20 वर्ष पहले उन्होंने सुलतानपुर में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराई, जब जनपद में गंभीर मरीजों के लिए ऐसी आधुनिक सुविधा बेहद सीमित थी। विशेष रूप से सर्पदंश के गंभीर मामलों में वेंटिलेटर की सुविधा अनेक मरीजों के लिए जीवन और मृत्यु के बीच अंतर साबित हुई।

सुलतानपुर और आसपास के जिलों में सर्पदंश के कारण गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले सैकड़ों मरीजों को आस्था हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रखकर उपचार दिया गया। इनमें से अनेक मरीजों को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा मिलने से नया जीवन मिला। डॉ. त्रिपाठी का मानना था कि गंभीर मरीज को बेहतर सुविधा समय पर उसके अपने जनपद में ही मिलनी चाहिए, ताकि इलाज में होने वाली देरी के कारण किसी की जान न जाए।

35 वर्षों से रहा आत्मीय संबंध

डॉ. के. त्रिपाठी से करीब 35 वर्षों से जुड़े रहे विजय पाण्डेय कहना है कि उनका व्यक्तित्व बेहद सहज, सरल और सेवाभावी था। चिकित्सा को उन्होंने केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना। नए चिकित्सा उपकरणों और आधुनिक तकनीकों को सुलतानपुर में लाने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किया। उनका उद्देश्य था कि जनपद के लोगों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों की ओर न भागना पड़े।

उनके निधन से चिकित्सा जगत में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। खासकर आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को छोटे शहर में स्थापित करने और उन्हें मरीजों तक पहुंचाने के उनके प्रयास लंबे समय तक याद किए जाएंगे।

*ऐसे चिकित्सक को मैंने नहीं देखा जो 55 वर्ष के जीवन में हृदय रोगियों के अत्याधुनिक चिकित्सा विधा में पारंगत हो*” — *डॉ. पवन सिंह*

युवा हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन सिंह ने डॉ. के. त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, “अपने जीवन में मैंने ऐसा प्रतिभावान चिकित्सक नहीं देखा, जिसने इस उम्र में भी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी जटिल प्रक्रियाओं को इतनी कुशलता से किया और दूसरों को भी उसे सीखने के लिए प्रेरित किया।”

उन्होंने कहा कि डॉ. त्रिपाठी ने सैकड़ों गंभीर हृदय रोगियों को स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध कराया। ऐसे अनेक मरीज थे, जिन्हें गंभीर स्थिति के कारण लखनऊ तक पहुंचाना संभव नहीं था। समय पर आस्था हॉस्पिटल में उपचार मिलने से उन्हें जीवनदान मिला।

*डॉ. पवन सिंह ने भावुक होकर कहा कि “मैं डॉ. के. त्रिपाठी को सादर प्रणाम करता हूं*। उनकी प्रतिभा, चिकित्सा के प्रति समर्पण और जज्बे को सलाम करता हूं। उनका जाना चिकित्सा जगत के लिए ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।”

डॉ. के. त्रिपाठी ने जिस समर्पण, साहस और दूरदृष्टि के साथ सुलतानपुर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की नींव मजबूत की, वह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान है। वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित चिकित्सा सुविधाएं और हजारों मरीजों को मिली नई जिंदगी उनके योगदान की कहानी हमेशा कहती रहेंगी।

चिकित्सा जगत में डॉ. के. त्रिपाठी का स्थान सदैव स्मरणीय रहेगा।

In

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें