सीनियर ने इस कदर टार्चर किया कि दरोगा की बढ़ी हार्ट बीट अस्पताल में भर्ती

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जौनपुर/जफराबाद:- थाने में अनुशासन के नाम पर एक जूनियर दरोगा को सीनियर द्वारा इतना टॉर्चर किया गया कि वह हार्ट अटैक के कगार पर पहुंच गया । आनन फानन में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टरों ने चेकअप किया तो पता चला कि हार्टबीट इतना बढ़ चुका था कि हार्टअटैक का कंडीशन आ गयी थी। दरोगा की हालत ख़राब होने से थाने में हड़कंप मच गया। फ़िलहाल संयोग अच्छा था कि समय रहते दरोगा अस्पताल पहुंच गया। डॉक्टरों ने नियंत्रित कर लिया। अपनी पीड़ा बताते हुए दरोगा ने कहा कि हमारे विभाग में अनुशासन के नाम पर कुछ सीनियर टॉर्चर कर रहे हैं। उनकी शिकायत भी नहीं की जा सकती। क्योंकि हमारे विभाग में अनुशासन के नाम पर ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। मामले के बारे में पूछे जाने पर दरोगा ने बताया कि एक विवेचना की फाइल है, जिसको तीन महीने से सीनियर दरोगा अपने पास रखा हुआ है। उक्त विवेचना में कुछ त्रुटि हो गई थी। जिसको सुधार के लिए मांगे जाने पर सीनियर दरोगा द्वारा बार-बार नौकरी खा जाने की धमकी देकर टॉर्चर किया जा रहा है। कोर्ट तथा सीनियर अधिकारियों द्वारा फाइल के बारे में पूछे जाने पर विवेचक के पास फाइल होने की जानकारी देकर गुमराह कर दे रहे है। ऐसे में मेरी जवाबदेही है। सीनियर दरोगा पिछले तीन महीने से मुझे टॉर्चर कर रहे हैं। सोमवार को स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ गई। टार्चर की वजह से हार्ट बीट बढ़ गया। घबराहट होने की वजह से जिला अस्पताल में जाना पड़ा। पीड़ित दरोगा ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि हमारे डिपार्टमेंट में जातिगत आधार पर भी भेदभाव किया जा रहा हैं। हमारी पीड़ा सुनने के लिए मानवाधिकार भी नहीं है। अनुशासन के नाम पर हम अपनी पीड़ा उच्च अधिकारियों से नहीं कह सकते। ऐसी स्थिति में घर परिवार छोड़कर लोगों की सेवा करने वाले इन सेवकों की पीड़ा आखिर कौन सुनेगा। कोई तो हो जो इनकी पीड़ा को सुने। दर्द को समझ सके। इनके साथ न्याय कर सके। लोगों को न्याय दिलाने वाला खुद के न्याय के लिए किसके पास जाएं। दरोगा ने कहा कि विभाग में अनुशासन के नाम पर टॉर्चर करने की प्रक्रिया से तमाम दरोगा व सिपाही सुसाइड कर चुके हैं। तथा कितनो की समय से पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई।