सरकारी जमीनों पर कब्जे का जाल,प्राणनाथपुर बछेड़िया में फूटा ग्रामीणों का आक्रोश, भू-माफिया पर फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का आरोप
अखण्डनगर सुल्तानपुर
अखंडनगर क्षेत्र के प्राणनाथपुर बछेड़िया गांव में पीडब्ल्यूडी और ग्राम सभा की करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर मंगलवार को जबरदस्त बवाल खड़ा हो गया। ग्राम प्रधान उदयभान निषाद की अगुवाई में दर्जनों महिला-पुरुष थाना परिसर पहुंच गए और कथित भू-माफिया जमुना वर्मा के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में बदलने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जे का एक संगठित खेल लंबे समय से चल रहा है। गांव वालों ने आरोप लगाया कि कथित भू-माफिया पहले भी आसपास के कई गांवों में रास्तों और सार्वजनिक जमीनों को निशाना बना चुका है। आरोप है कि पहले विवादित या सरकारी भूमि पर कब्जा किया जाता है, फिर गुपचुप तरीके से बाहरी लोगों को बेच दिया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक, इसी रणनीति के तहत गांव की सार्वजनिक संपत्तियों को धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि विवादित जमीन पर पहले बोरिंग कराई गई, उसके बाद अस्थायी निर्माण कराया गया और अब पूरे भूभाग पर स्थायी निर्माण एवं चारदीवारी खड़ी करने का कार्य शुरू कर दिया गया। मंगलवार को जैसे ही निर्माण कार्य तेज हुआ, पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। महिलाएं भी बड़ी संख्या में विरोध में उतर आईं और सरकारी जमीन बचाने की मांग को लेकर थाना पहुंच गईं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी धीरेंद्र कुमार वर्मा ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों से संबंधित अभिलेख, राजस्व रिकॉर्ड, आदेश की प्रतियां और अन्य आवश्यक दस्तावेज तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही एहतियातन कब्जे और निर्माण कार्य को तीन दिन तक रोकने का निर्देश दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कठोर कार्रवाई नहीं की तो सरकारी जमीनों पर कब्जे का यह नेटवर्क और तेजी से फैल सकता है। गांव में पूरे घटनाक्रम को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों की पड़ताल पर टिक गई हैं कि आखिर करोड़ों की सार्वजनिक भूमि को निजी कब्जे में बदलने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी जमीनों की खरीद-फरोख्त का कोई बड़ा खेल संचालित किया जा रहा है।
के मास न्यूज संवाददाता दोस्त पुर




















