बुद्ध पूर्णिमा पर शिक्षा, समता और जागरूकता का संदेश, बच्चों में बांटी गई अध्ययन सामग्री

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स्ट्रिंगर रिपोर्ट – हीरा मणि गौतम

जौनपुर – जिले के लपरी ग्राम सभा में 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। यह आयोजन आर एस कोचिंग सेंटर लपरी एवं समाजसेवी सिकंदर कुमार के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ, जिसका संचालन अरविंद कुमार मास्टर साहब ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों और ग्रामीणों के बीच शिक्षा, समता और जागरूकता का संदेश फैलाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों को कॉपी और कलम वितरित किया गया , जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और उत्साह बढ़े। इस अवसर पर गौतम बुद्ध एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्षों और उनके द्वारा दिए गए महान संदेशों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि बुद्ध ने मानवता, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाया, जबकि बाबा साहब ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन बताया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बौद्धाचार्य कन्हैयालाल मास्टर उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर और समाज को सशक्त बनाती है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे कठिनाइयों से घबराए बिना निरंतर अध्ययन करते रहें और अपने जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करें। विशिष्ट अतिथि सोनू बौद्ध ने बाबा साहब के विचारों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का संदेश याद दिलाया और उनसे जोश के साथ नारे भी लगवाए।

वहीं, विशिष्ट अतिथि मुकेश कुमार ने बच्चों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षित होना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें। कार्यक्रम में भुआल सोनकर और डॉ. राम किशुन ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देने की बात कही।

कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि द्वारा त्रिशरण एवं बुद्ध वंदना के साथ किया गया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बन गया। इस अवसर पर गोविंदा, अनुराग, रवि, चंद्रशेखर, साहिल, शिवम, अंकित, आकाश कुमार, अशोक कुमार, महेंद्र कुमार , चंद्रभान , सुमित्रा, सरिता, जसवंती, शकुंतला सहित अनेक ग्रामीण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के प्रति लोगों को प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास भी सिद्ध हुआ।

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