लाखों की लागत से बना नाला बना अभिशाप, दुर्गंध और गंदगी से त्रस्त ग्रामीणों ने बीडीओ से लगाई गुहार

0
6

 

हंसवर/अम्बेडकरनगर

स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाखों रुपये की लागत से निर्मित नाला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी गांव के विकास की पहचान माना जाने वाला यह नाला अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। वर्षों से सफाई और मरम्मत न होने के कारण नाला गंदगी से पट गया है, जिससे उठ रही दुर्गंध और फैल रहे मच्छरों ने स्थानीय लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।

बसखारी विकासखंड के हंसवर कस्बा स्थित मोहल्ला बभनहिया में नाले की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। जगह-जगह से टूट चुके नाले की ईंटें आसपास के किसानों की खेती को नुकसान पहुंचा रही हैं। वहीं नाले में जमा गंदा पानी और कूड़े-कचरे से उठ रही सड़ांध के कारण लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दिनभर दुर्गंध से परेशान लोग शाम होते ही मच्छरों के हमले का सामना करने को मजबूर हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले करीब पांच वर्षों से नाले की न तो मरम्मत कराई गई और न ही नियमित सफाई हुई। परिणामस्वरूप नाला पूरी तरह जाम हो चुका है और गंदा पानी आसपास जमा रहने लगा है। लगातार जलभराव के कारण मकानों की नींव कमजोर हो रही है तथा दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं। लोगों को भय है कि बरसात के मौसम में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। कई परिवारों ने दुर्गंध और मच्छरों से बचने के लिए अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां तक बंद रखना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि सफाई कर्मी गांव में नियमित रूप से सफाई करने नहीं आते, जिससे हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं।

मोहल्ले के निवासी कृष्ण कुमार तिवारी, इनामुलहक, अब्दुल्लाह, असद, नासिर सहित अन्य ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को शिकायती पत्र सौंपकर नाले की तत्काल मरम्मत और विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिम के पास दुर्गा मंदिर जाने वाले मार्ग पर बनी नाली की स्थिति भी बेहद दयनीय है। कुछ दिन पूर्व मोहल्ला हंसय्या के लोगों ने प्रशासनिक उदासीनता से नाराज होकर खुद फावड़ा उठाया और श्रमदान के जरिए नाली की सफाई की थी। उस दौरान भी ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सफाई कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए लापरवाही के आरोप लगाए थे।

क्षेत्रीय जनता का कहना है कि सरकार गांवों में स्वच्छता और विकास पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण योजनाओं का लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब इस बदहाल नाले की सुध ली जाएगी और कब ग्रामीणों को गंदगी, दुर्गंध और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।

In

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें