आवास विकास का मुख्य द्वार बना हादसे का खतरा,पहले दिन ही धंस गई करोड़ों की पुलिया
सुलतानपुर
सुल्तानपुर शहर की आवास विकास कॉलोनी के मुख्य द्वार से प्रवेश करना इन दिनों लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है। नगर पालिका की ओर से करोड़ों रुपये के टेंडर से कराया जा रहा नाले का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ, लेकिन निर्माणाधीन पुलिया के आधे हिस्से से सोमवार को आवागमन शुरू करा दिया गया। रास्ता खुलने के कुछ ही समय बाद पुलिया का हिस्सा धंस गया और एक बाइक सवार की बाइक उसमें फंस गई। गनीमत रही कि बाइक सवार किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बच गया।
पुलिया के पहले ही दिन धंसने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही अधूरी पुलिया पर आवागमन शुरू कराना लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा है।
500 से अधिक परिवार परेशान, एलआईसी कार्यालय तक आवाजाही प्रभावित
आवास विकास कॉलोनी में 500 से अधिक परिवार निवास करते हैं। इसी परिसर में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मुख्य कार्यालय भी स्थित है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन रहता है। पुलिया और नाले के निर्माण के कारण मुख्य रास्ता पहले से ही बदहाल है। बरसात के बाद स्थिति और खराब हो गई है। फिसलन के चलते दोपहिया वाहन सवारों के साथ पैदल आने-जाने वाले लोगों के भी गिरने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन पुलिया का जो हिस्सा आवागमन के लिए खोला गया था, उसकी मजबूती को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। मार्ग खुलते ही पुलिया के धंसने की घटना ने आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि इस रास्ते से कोई भारी वाहन गुजरता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
अधूरी पुलिया पर आवागमन क्यों शुरू कराया?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब नाले और पुलिया का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ था तो अधूरे मार्ग को आवागमन के लिए क्यों खोला गया? क्या मार्ग खोलने से पहले नगर पालिका के संबंधित अभियंताओं ने निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच की थी? यदि जांच की गई थी तो पहले ही दिन पुलिया धंसने की नौबत कैसे आ गई?
स्थानीय लोगों ने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल पुलिया की मरम्मत कराने के बजाय पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके।
डीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग
पुलिया धंसने और बरसात में रास्ते की बदहाली से नाराज स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने तक सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था की जाए और किसी भी कीमत पर अधूरे एवं असुरक्षित मार्ग से लोगों की आवाजाही न कराई जाए।
अब देखना यह है कि पहले ही दिन निर्माणाधीन पुलिया के धंसने के मामले में नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता जांच कराकर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाती है।

















