उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के आदेश अनुसार तालाब की जमीन को कराया गया खाली

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अखण्डनगर, /सुल्तानपुर

ग्राम पंचायत पाराबासूपुर के राजस्व गांव पसना स्थित गाटा संख्या 137 की तालाब भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए बुधवार को राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ अभियान चलाया। माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ के निर्देश एवं जिलाधिकारी सुल्तानपुर के बेदखली आदेश के अनुपालन में नायब तहसीलदार दोस्तपुर प्रदीप कुमार मिश्रा तथा राजस्व निरीक्षक रामप्रकाश उपाध्याय की अगुवाई में कार्रवाई की गई। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

बुधवार सुबह राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ गांव पसना पहुंची। सबसे पहले विवादित तालाब की भूमि का सीमांकन कराया गया। राजस्व अभिलेखों के आधार पर तालाब की मूल भूमि को चिन्हित करते हुए अधिकारियों ने पैमाइश कराई। इसके बाद बेदखली आदेश के तहत तालाब की भूमि पर रखे गए लकड़ी, उपले, पुरानी ईंटें तथा अन्य सामान हटवाए गए। प्रशासन की मौजूदगी में अतिक्रमित हिस्से को खाली कराया गया और संबंधित पक्ष को भविष्य में दोबारा कब्जा न करने की चेतावनी दी गई।

नायब तहसीलदार प्रदीप कुमार मिश्रा ने बताया कि ग्राम पसना निवासी राजकुमार द्वारा तालाब की भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ में की गई थी। न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लगभग तीन वर्ष पूर्व भी गांव के ही सीताराम द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई थी। उस समय प्रशासन ने तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया था, लेकिन बाद में दोबारा अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मिली।

उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद राजस्व विभाग द्वारा जांच कराई गई, जिसमें तालाब की भूमि पर सामान रखे जाने एवं अतिक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद पुनः सीमांकन कराते हुए कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई। नायब तहसीलदार ने कहा कि तालाब जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार सार्वजनिक भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

राजस्व निरीक्षक रामप्रकाश उपाध्याय ने ग्रामीणों को बताया कि तालाब ग्राम समाज की संपत्ति है और उसका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में तालाबों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि सार्वजनिक जल स्रोतों पर लगातार कब्जा होता रहेगा तो भविष्य में जल संकट की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने ग्रामीणों से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न करने तथा कहीं भी अवैध कब्जा होने पर प्रशासन को सूचना देने की अपील की।

कार्रवाई के दौरान पुलिस बल पूरी तरह सतर्क रहा। प्रशासन को आशंका थी कि बेदखली के समय विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए पर्याप्त पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया था। हालांकि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।

वहीं बेदखल किए गए सीताराम ने प्रशासनिक कार्रवाई पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने तालाब की भूमि पर कोई स्थायी निर्माण नहीं कराया था। उनके अनुसार वहां केवल लकड़ी, उपले और कुछ पुरानी ईंटें रखी गई थीं। उन्होंने बताया कि पूर्व में उन पर लगभग अस्सी हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे उन्होंने जमा कर दिया है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता राजकुमार ने कहा कि तालाब की भूमि अब भी पूरी तरह कब्जा मुक्त नहीं हुई है और प्रशासन को और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

ग्रामीणों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही। अधिकांश ग्रामीणों ने तालाब एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई का समर्थन किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

 

नरेश कुमार केमास न्यूज पत्रकार अखण्डनगर सुल्तानपुर

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