विचरण कर रहे गोवंश को वाहन ने रौंदा, ग्रामीणों की मानवीय संवेदना और पशु चिकित्सक की कर्तव्यनिष्ठा बनी मिसाल

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सुल्तानपुर

 

बेलवाई-हलियापुर मार्ग स्थित बछेड़िया गांव के निकट यूं ही स्वच्छंद विचरण कर रहा एक गोवंश उस समय काल का ग्रास बनते-बनते बचा, जब अखण्डनगर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उसे बुरी तरह रौंद डाला। भीषण टक्कर इतनी जोरदार थी कि गोवंश करीब 25 मीटर तक सड़क पर घिसटता चला गया और उसके शरीर पर गहरी चोटें आईं। घटना को अंजाम देकर वाहन चालक बिना रुके मौके से फरार हो गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश भी व्याप्त हो गया।

 

चीत्कार सुन उमड़ पड़ा पूरा मोहल्ला, बोरे पर लिटाकर की गई प्राथमिक सेवा

गोवंश की पीड़ादायक चीत्कार सुनकर आसपास के घरों से पुरुष, महिलाएं और नौनिहाल बच्चे तक दौड़े चले आए। देखते ही देखते सड़क किनारे भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने बिना पल गंवाए घायल गोवंश को सड़क किनारे एक बोरे पर बड़े ही सावधानीपूर्वक ढंग से लिटाया, ताकि उसे और अधिक कष्ट न हो। मौके पर जुटा हर व्यक्ति एक मूक प्राणी की पीड़ा को कम करने की चिंता में व्यग्र दिखा, मानो वह पीड़ा किसी अपने की ही हो।

 

महिला ने घावों पर लगाया मरहम, मातृत्व भाव से सहलाती रही पीड़ा

घायल गोवंश की तड़प देखकर एक ग्रामीण महिला भावुक हो उठी और उसकी आंखें नम हो गईं। उसने बिना किसी संकोच के गोवंश के सिर और शरीर पर लगी चोटों पर स्वयं अपने हाथों से मरहम लगाया। मातृत्व स्नेह से ओतप्रोत होकर वह बार-बार गोवंश के सिर को सहलाती रही, मानो अपनी ही संतान की पीड़ा हर लेना चाहती हो। आसपास खड़ी अन्य महिलाएं और मासूम बच्चे भी पलक झपकाए बिना यह करुणामयी दृश्य निहारते रहे। यह मार्मिक दृश्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गया कि मूक पशुओं के प्रति गांव की संवेदनशीलता आज भी उतनी ही अक्षुण्ण है, जितनी पीढ़ियों पहले हुआ करती थी।

 

उपस्थित ग्रामीणों ने तत्काल दी पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना, बिना विलंब पहुंचकर किया उपचार

घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बिना समय गंवाए तत्काल अखण्डनगर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही डॉ. रणजीत ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए बिना विलंब किए मौके पर पहुंचकर घुटनों के बल बैठकर घायल गोवंश की बारीकी से जांच की। उन्होंने गोवंश को दर्द निवारक इंजेक्शन व आवश्यक दवाएं दीं, जिसके उपरांत गोवंश की हालत में सुधार के संकेत मिलने लगे। इस दौरान ग्रामीण चिकित्सक के इर्द-गिर्द खड़े होकर पूरी उपचार प्रक्रिया को उत्सुकता, राहत और चिंता के मिश्रित भावों के साथ निहारते रहे।

 

मूक पशुओं के प्रति संवेदना और सेवा भाव की जीवंत मिसाल बनी घटना

इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में भी गांव की मिट्टी में मानवता, करुणा और मूक पशुओं के प्रति सेवा-भाव आज भी पूर्णतः जीवंत है। बिना किसी स्वार्थ के जुटे ग्रामीणों की सामूहिक संवेदना, मरहम लगाती महिला की ममतामयी सेवा और पशु चिकित्सक की तत्परता , यह पूरा दृश्य कर्तव्यनिष्ठा एवं मानवीय करुणा के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण बनकर समूचे क्षेत्र में चर्चा एवं प्रेरणा का विषय बना रहा। वहीं, वाहन चालक के फरार होने की घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा एवं लापरवाह वाहन चालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को भी रेखांकित कर दिया है।

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