UGC से लेकर आर्थिक आधार पर विशेष अवसर तक उठी आवाज, सैकड़ों लोगों ने भरी हुंकार ,तिलक, तराजू और तलवार—नहीं सहेगा अत्याचार
सुल्तानपुर
शिक्षा, युवाओं के भविष्य, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के अधिकार, सामाजिक एकता और सम्मान के मुद्दों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने प्रतिभाग किया। गौ रक्षा वाहिनी उत्तर प्रदेश, नवयुवक दल पार्टी, करणी सेना, क्षत्रिय सभा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान UGC की नीतियों से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आर्थिक आधार पर विशेष अवसर की मांग को लेकर आवाज बुलंद की गई।
कार्यक्रम के दौरान “तिलक, तराजू और तलवार—नहीं सहेगा अत्याचार” का नारा भी प्रमुखता से गूंजा। वक्ताओं ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि तिलक ज्ञान, विद्वता और संस्कार का प्रतीक है, तराजू आर्थिक मजबूती, व्यापार एवं संतुलन का प्रतीक है, जबकि तलवार साहस, सामर्थ्य और आत्मबल का प्रतीक है। वक्ताओं ने कहा कि इन तीनों शक्तियों का सकारात्मक और लोकतांत्रिक तरीके से उपयोग समाज को अपने अधिकारों के लिए मजबूत आवाज उठाने की शक्ति देता है।
*गौ रक्षा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह* *बोले—ज्ञान, आर्थिक मजबूती और सामर्थ्य से बनेगा मजबूत समाज*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वेश कुमार सिंह, प्रदेश प्रभारी गौ रक्षा वाहिनी उत्तर प्रदेश एवं नवयुवक दल ने कहा कि समाज की वास्तविक ताकत केवल संख्या में नहीं, बल्कि ज्ञान, आर्थिक मजबूती और सामर्थ्य में होती है। उन्होंने कहा कि “तिलक, तराजू और तलवार” को किसी के विरुद्ध नफरत का प्रतीक बनाने के बजाय ज्ञान, आर्थिक आत्मनिर्भरता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के साहस के रूप में समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज में ज्ञान की शक्ति, आर्थिक मजबूती और सामर्थ्य एक साथ आती है तो वह अन्याय एवं भेदभाव के खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से मजबूती से आवाज उठा सकता है। उन्होंने कहा कि “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या वर्ग से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था से है जिसमें आर्थिक कमजोरी के कारण किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित हो।”
सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के क्षेत्र में पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने सरकार से UGC से जुड़े नीतिगत विषयों पर विद्यार्थियों और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए फीस में राहत, छात्रवृत्ति, निःशुल्क कोचिंग और अध्ययन सामग्री जैसी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की। प्रदेश महामंत्री जय शंकर दुबे ने कहा कि शिक्षा समाज की सबसे बड़ी शक्ति है और संगठन उस शक्ति को सही दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को केवल आर्थिक अभाव के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निःशुल्क कोचिंग, छात्रवृत्ति और आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों से युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की। क्षत्रिय सभा के सौरभ सिंह ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए सामाजिक एकता और आपसी सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता किसी भी समाज के विकास की आधारशिला हैं।उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहें। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।करणी सेना के बसंत सिंह ने कहा कि देश और समाज का भविष्य युवाओं के हाथ में है। यदि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली युवाओं को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उचित संसाधन नहीं मिलेंगे तो उनकी प्रतिभा का पूरा लाभ समाज को नहीं मिल पाएगा।उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने भविष्य और अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा तथा शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना होगा। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की मांग की।
संरक्षक राकेश सिंह ‘दद्दू’ ने कहा कि समाज तभी मजबूत होगा जब उसकी नई पीढ़ी शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक होगी। उन्होंने कहा कि किसी गरीब या आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे की प्रतिभा केवल संसाधनों के अभाव में दबना नहीं चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार की शिक्षा एवं रोजगार संबंधी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों और युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।शनि मिश्रा ने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षित और जागरूक युवा ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर देने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं और अपने अधिकारों की जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि किसी भी मांग को संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाना ही समाज को मजबूत दिशा देगा।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को विशेष अवसर की मांग
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों एवं युवाओं के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। ज्ञापन में UGC से संबंधित नीतियों एवं निर्णयों में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों का विशेष ध्यान रखने, उच्च शिक्षा में फीस राहत एवं छात्रवृत्ति बढ़ाने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई।ज्ञापन में आर्थिक आधार पर आरक्षण अथवा विशेष अवसर की मांग पर संविधान एवं प्रचलित कानूनों के अनुरूप गंभीरता से विचार करने का अनुरोध भी किया गया।
ज्ञापन की 10 प्रमुख मांगें
1. UGC से संबंधित नीतियों एवं निर्णयों में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।
2. आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में फीस राहत, छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाएं दी जाएं।
3. आर्थिक आधार पर आरक्षण अथवा विशेष अवसर की मांग पर संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप विचार किया जाए।
4. जरूरतमंद युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
5. उच्च शिक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए फीस में राहत की व्यवस्था प्रभावी बनाई जाए।
6. UGC से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में विद्यार्थियों एवं युवाओं के प्रतिनिधियों से संवाद किया जाए।
7. उच्च शिक्षा एवं रोजगार में आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
8. युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए जिला एवं प्रदेश स्तर पर प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।
9. शिक्षा एवं रोजगार संबंधी सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।
10. सरकार इन मांगों पर सकारात्मक एवं संवैधानिक दृष्टिकोण से विचार कर उचित निर्णय ले।
सैकड़ों लोग रहे मौजूद कार्यक्रम में जिला संयोजक उदय प्रकाश मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष सुभाष सोनकर, जिला उपाध्यक्ष प्रदीप कसौंधन, जिला उपाध्यक्ष मुकेश कसौंधन, किरण सोनी, राजवीर श्रीवास्तव, जिला उपाध्यक्ष बृजेश श्रीवास्तव ‘बंटू’, जिला अध्यक्ष पूनम सिंह, संरक्षक राकेश सिंह ‘दद्दू’ सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।इसके अलावा प्रेमचंद श्रीवास्तव, रामजतन वर्मा, रामकरण यादव, सुनील सिंह, अरुण सिंह, सतीश यादव, अजय सिंह, तारिक खान, शेर बहादुर यादव, कामता प्रसाद मिश्रा, विकास मिश्रा, अरुण पांडेय, पंकज सिंह, बंटी सिंह, अनिल अग्रहरि सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, आर्थिक मजबूती, सामाजिक सम्मान, युवाओं के भविष्य और समान अवसर से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि आर्थिक स्थिति किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी के भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि ज्ञान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामर्थ्य और संगठनात्मक एकता के माध्यम से समाज अपने अधिकारों की आवाज को मजबूत कर सकता है तथा सभी मांगों को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष रखा जाना चाहिए।


















