हंसवर/अम्बेडकर नगर
रामपुर-बेनीपुर गांव में रिक्त राशन की दुकान के चयन को लेकर सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब कोटेदार के चयन के लिए प्रस्तावित मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ग्रामीणों ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर मौजूद सहायक विकास अधिकारी उमाशंकर सिंह को ग्रामीणों ने घेर लिया। सूचना पर हंसवर थाने की पुलिस के साथ टांडा क्षेत्र से भी पुलिस फोर्स पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को शांत कराया, जिसके बाद मतदान के लिए पहुंचे लोगों को वापस घर लौटना पड़ा।
रामपुर-बेनीपुर में राशन की दुकान लंबे समय से रिक्त चल रही है। दुकान के चयन को लेकर गांव में काफी समय से गहमागहमी बनी हुई है। इस मामले में ग्रामीणों की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जाते रहे हैं। सोमवार को राशन कार्डधारकों की मौजूदगी में कोटेदार चयन के लिए मतदान कराया जाना था। इसके लिए प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की गई थी।
राशन की दुकान के लाइसेंस के लिए रामसरन, रोशनलाल, रामूलाल समेत समूह की करीब आठ महिलाओं ने आवेदन किया था। ग्रामीणों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान अधिकांश लोगों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए। इसी बात को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर तू-तू, मैं-मैं की स्थिति बन गई और ग्रामीणों ने सहायक विकास अधिकारी उमाशंकर सिंह को घेर लिया।
ग्रामीणों का कहना था कि राशन की दुकान का चयन खुली बैठक और पारदर्शी तरीके से कराया जाना चाहिए, जबकि अधिकारियों द्वारा समूह की महिलाओं के चयन को प्राथमिकता दिए जाने से वे नाराज थे। विरोध बढ़ने के कारण मौके पर मौजूद अधिकारी असहज स्थिति में आ गए। सूचना मिलते ही हंसवर थानाध्यक्ष पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद टांडा क्षेत्र से भी पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों को समझाकर किसी तरह शांत कराया।
हंगामे और विवाद की स्थिति के कारण सोमवार को प्रस्तावित मतदान नहीं हो सका। मतदान के लिए काफी संख्या में राशन कार्डधारक मौके पर पहुंचे थे, लेकिन स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें वापस घर जाना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित किया।
ग्रामीणों में रामसरन समेत अन्य लोगों का कहना है कि उन्होंने राशन की दुकान के चयन को लेकर उपजिलाधिकारी से शिकायत की थी, जिसके बाद अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया था। ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में सभी पात्र आवेदकों को समान अवसर दिए जाने और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की।
वहीं, खंड विकास अधिकारी सतीश सिंह ने बताया कि राशन की दुकान के चयन में शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार वरीयता के आधार पर समूह की महिलाओं का चयन किया जाना है। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा सहायक विकास अधिकारी को बंधक बनाए जाने की बात पर कहा कि ग्रामीण स्वतंत्र हैं। सभी आवेदनों को एनआरएलएम को भेजा जाएगा और वहां से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार चयन प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
राशन की दुकान के चयन को लेकर हुए इस विवाद के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। प्रशासन द्वारा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।



















